अमर उजाला स्वस्थ धरा, खेत हरा
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कृषि मंत्री ने कहा कि यह एक उदाहरण है कि कैसे बढ़ते मेट्रो शहर आमदनी की नई राह खोलने वाले हैं। कार्यक्रम में कई ऐसे किसानों को सम्मानित भी किया गया जिन्होंने खेती के सहारे सफलता अर्जित की है और दूसरों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।
कार्यक्रम में बोलते हुए अमर उजाला के सलाहकारी संपादक विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि दुनिया में मिट्टी को मृत पदार्थ की तरह से देखा जाता है। लेकिन भारत में यही मिट्टी एक मां के रुप में देखी जाती है क्योंकि इसी मिट्टी में पलते, खेलते हुए हम आगे बढ़ते आए हैं। यह एक जीवित प्राणी है क्योंकि इसमें लाखों प्रकार के जीव पाए जाते हैं जो इसकी उर्वरता सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक मां के बेटे (किसान) तभी स्वस्थ और सुरक्षित रह सकते हैं जब उनकी मां स्वस्थ और सुरक्षित रहती है। इसलिए किसानों को देश की मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। इसमें अनावश्यक खाद डालकर इसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कृषिमंत्री ने कहा कि देश में पहली बार मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए पूरे देश में एक हजार प्रयोगशालाएं बनवाई जा रही हैं। किसान यहां से यह पता कर सकते हैं कि उनकी मिट्टी किस प्रकार की है। उसकी उर्वर क्षमता कितनी है। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उस मिट्टी में किस प्रकार की फसलों को बोया जाना चाहिए और उनसे कितना उत्पादन लिया जा सकता है। यह समझने के बाद किसान अपने खेतों में उचित फसल को बोकर उचित लाभ कमा पाएगा।
राधामोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने किसानों को बिचौलियों के चंगुल से छुड़ाने के लिए ई-तकनीकी का खूब सहारा लिया है। अब मंडियों में छुपे हाथों के इशारों से कोई उसकी फसल का मूल्य नहीं तय कर सकता। इसके लिए उसे कंप्यूटर पर अंकित करके बताना होगा। किसान अपने मोबाइल पर ही यह देख सकता है कि किस मंडी में किस फसल का क्या रेट चल रहा है। उसके मुताबिक वह अपनी प्राथमिकता पर अपनी फसल बेच सकेगा।
इसके बाद भी किसी समय किसी चीज विशेष की आपूर्ति ज्यादा हो जाती है तो कभी कम। इसकी वजह से कुछ परेशानियां होती हैं। लेकिन सरकार इससे निबटने का प्रयास कर रही है। किसी किसान को कोई नुकसान न हो, उसके लिए प्रयास किये जा रहे हैं।
पुस्तक स्वस्थ धरा, खेत हरा में इस सरकार के द्वारा अब तक चालू की गई सभी योजनाओं की जानकारी है। पुस्तक में यह भी बताया गया है कि किसी योजना का लाभ लेने के लिए किसान को कहां संपर्क करना पड़ेगा। यह पुस्तक किसानों के लिए बहुत उपयोगी है।
कार्यक्रम को कृषिमंत्री राधामोहन सिंह के अलावा आईसीएआर के वैज्ञानिक एके सिंह, नैफेड के उच्च अधिकारी संजीव कुमार चड्ढा, अमर उजाला के सलाहकारी संपादक विनोद अग्निहोत्री, संपादक जयदीप कर्णिक और राजीव कुमार ने संबोधित किया।