परिजनों को पहले से मिल रही थीं धमकियां
उन्होंने बताया कि जेसीओ की पहचान चरंगपत ममांग लेईकाई निवासी कोंसम खेड़ा सिंह के रूप में हुई है। कोंसम खेड़ा सिंह शुक्रवार को छुट्टी पर थे। कुछ लोग सुबह नौ बजे उनके घर में घुस गए और उन्हें एक वाहन में ले गए थे। अधिकारियों ने बताया था कि अपहरण क्यों किया गया है, इसकी वजह का पता नहीं चल पाया। लेकिन पहली नजर में यह मामला जबरन वसूली का लग रहा है। सेना के अधिकारी के परिजनों पहले इस तरह की धमकियां मिल चुकीं थीं।
सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू किया तलाशी अभियान
जेसीओ के अपहरण की सूचना मिलने पर सभी सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें बचाने के लिए साझा तलाशी अभियान शुरू किया। राष्ट्रीय राजमार्ग-102 पर चलने वाले सभी वाहनों की जांच की गई। आखिरकार शाम साढ़े छह बजे जेसीओ की रिहाई सुनिश्चित हो पाई। मणिपुर में संघर्ष शुरू होने के बाद से यह चौथी घटना है, जब छुट्टी या ड्यूटी पर तैनात सैनिकों या उनके रिश्तेदारों को असामाजित तत्वों ने निशाना बनाया।
पिछले साल भी सेना के जवान का हुआ था अपहरण
पिछले साल सितंबर में असम रेजिमेंट के एक पूर्व सैनिक सर्तो थांगथांग कोम का घाटी में एक सशस्त्र समूह ने अपहरण किया था और उनकी हत्या कर दी थी। वह मणिपर के लीमाखोंग में रक्षा सेवा कोर (डीएससी) में तैनात थे। दो महीने बाद एक हथियारबंद समूह ने चार लोगों का उस समय अपहरण कर लिया था, जब वे वाहन से पहाड़ी जिले चुराचांदपुर से लीमाखोंग जा रहे थे। चारों जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान के परिवार के सदस्य थे। पांचवें सदस्य (सैनिक के पिता) घायल हो गए थे और भागने में कामयाब रहे। बाद में सेना इलाज के लिए उन्हें दीमापुर ले गई। बाद में उन्हें असम के गुवाहाटी के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया।
एएसपी के घर पर भी हुआ था हमला
इस साल 27 फरवरी को मणिपुर पुलिस के एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) पर इंफाल शहर में उनके घर पर हमला किया गया था। इस मामले में हमलावर समूह की पहचान अरमबाई टेंगोल (एटी) के रूप में की गई थी। इस घटना के बाद मणिपुर पुलिस के कमांडो ने इफाल और अन्य इलाकों में हथियार डाल दिए थे।