फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jaya Kishori on Marriage: शादी के बारे में क्या बोलीं जया किशोरी; उन्हें क्या है डर, कैसा जीवनसाथी चाहती हैं?

Tue, 27 Feb 2024 04:58 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

अमर उजाला संवाद के दूसरे दिन मशहूर कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी बतौर अतिथि शामिल हुईं। 'सार्थक जीवन की बात' सत्र में जया किशोरी ने अपने बारे में भी खुलकर बात की।
विज्ञापन
जया किशोरी। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

'अमर उजाला संवाद - उत्तर प्रदेश' के दूसरे दिन मुख्य वक्ता के तौर पर मोटिवेशनल स्पीकर और स्पिरिचुअल ओरेटर जया किशोरी मौजूद थीं। उन्होंने जीवन दर्शन, आध्यात्म और अपनी जिंदगी से जुड़े भविष्य के फैसलों पर खुलकर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि शादी और जीवनसाथी के बारे में वे क्या सोचती हैं। पढ़िए उनसे हुई बातचीत के अंश...

विज्ञापन


आपने कुछ सोचा है अपने लाइफ पार्टनर के बारे में?
जया किशोरी:
बुनियादी चीजें होनी चाहिए। मुझे 22 साल हो गए काम करते हुए। मेरी अपनी एक जीवनशैली है। कोई ऐसा हो, जो इस जीवनशैली और मेरे जुनून को समझे। यह पैसे के बारे में नहीं है, यह मेरी चॉइस के बारे में है। अगर कोई यह समझे तो ठीक है, नहीं तो मैं उसके बिना भी खुश हूं। शादी मेरे लिए चेक लिस्ट नहीं है। मैं स्कूल में हमेशा कहती थी कि 22-23 साल की उम्र में मैं शादी कर लूंगी। फिर समझ आता है कि यह तीन-चार दिन का जश्न नहीं है। आपको 50-60 साल किसी व्यक्ति के साथ जिंदगी बिताना है। यह जरूरी है कि आप एकदूसरे की भावनाएं को समझें। किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है कि वो दूसरे की जिंदगी को सुधारे। हर माता-पिता को लगता है कि शादी के बाद बेटियां दूर हो जाएंगी। मैं इस बात को लेकर गंभीर हूं। हम दो बहने हैं। अगर लड़कियां जिम्मेदारियां उठाएंगी, तभी हर माता-पिता कहेंगे कि बेटा हो या बेटी, हमें फर्क नहीं पड़ता। जब लड़कियां जिम्मेदारी नहीं उठा पातीं, तब माता-पिता को लगता है कि काश, बेटा होता जो सहारा बनता। बेटियों का फर्ज बनता है कि हम माता-पिता को कुछ बेहतरीन साल दें। मेरे माता-पिता समझ चुके हैं कि उन्हें मेरे आसपास ही रहना होगा। वे शादी के लिए मुझ पर दबाव नहीं डालते। वे बस ये चाहते हैं कि मैं खुश रहूं। 

एक उम्र के बाद लड़कियों पर दबाव आने लगता है। वे सोचती हैं कि पता नहीं कैसा जीवनसाथी मिलेगा। क्या आपको भी ऐसा लगता है?
जया किशोरी:
यह विचार मेरे मन में भी आता है। लड़कियों के साथ यह ज्यादा होता है। जब आप काम करने लगते हैं तो आप एक तरह की जीवनशैली में जी रहे होते हैं। माता-पिता आपको किसी काम के लिए नहीं रोकते। जब मैं शादी के बारे में सोचती हूं तो डरती हूं कि वहां कहा जाएगा कि यह काम मत करो तो क्या होगा क्योंकि मुझे इसकी आदत नहीं है। मैं पारिवारिक महिला होना चाहती हूं, लेकिन अपनी चॉइस से, किसी की जबर्दस्ती से नहीं। मुझसे कोई जबर्दस्ती न कराए कि यह काम छोड़ो और अब यह काम करो। कई बार मांएं बच्चों से बोल देती हैं कि हमने यह त्याग किया है तुम्हारे लिए। तब आपको वो आपको सुना नहीं रहीं, वो दुख जताती हैं कि उन्होंने भी आपके लिए कुछ सपने छोड़े हैं। यहां जितनी मांएं बैठी हैं, उनसे पूछना चाहूंगी कि आपने जिंदगी में जो कुछ त्याग किया है, क्या आप चाहती हैं कि आपकी बेटी भी वैसी ही जिंदगी त्याग करते हुए जिए?

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें