1987 बैच के आईपीएस दिलबाग सिंह को 2018 में जम्मू-कश्मीर का पुलिस महानिदेशक बनाया गया था। उन्हें यह जिम्मेदारी ऐसे समय में दी गई थी, जब आतंकियों द्वारा पुलिस के जवानों और उनके रिश्तेदारों को अगवा करने के मामलों में काफी तेजी देखी जा रही थी। दक्षिण कश्मीर में आतंकियों ने एक दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों और उनके रिश्तेदारों को अगवा कर लिया था। दिलबाग सिंह ने केवल अपने पुलिस कर्मियों को ही सुरक्षा प्रदान नहीं की, बल्कि आतंकियों की कमर भी तोड़ डाली। दिलबाग सिंह का नाम सबसे पहले उस वक्त चर्चा में आया था, जब श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह हॉस्पिटल के अंदर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने हमला कर एक पाकिस्तानी आतंकवादी अबु हंजूला उर्फ नावीद जट को छुड़ा लिया था। इस हमले में दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। फरवरी 2018 में हुई इस घटना के बाद आईपीएस अफसर दिलबाग सिंह को जेल विभाग का डीजी नियुक्त किया गया था। जम्मू-कश्मीर सरकार ने 06 सितंबर 2018 को दिलबाग सिंह को राज्य के पुलिस महानिदेशक पद पर नियुक्त किया था।
जानकारों का कहना है कि दिलबाग सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान 2019 में सबसे बड़ी चुनौती का सामना किया था। केंद्र सरकार ने अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस चुनौतीपूर्ण कार्य को आसान बनाने वाली टीम में दिलबाग सिंह भी शामिल रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक लॉकडाउन की स्थिति रही थी। यहां तक कि मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया था। उस वक्त दिलबाग सिंह ने सीमा पार से आने वाले आतंकियों, घाटी के भीतर मौजूद उनके मददगारों और पत्थरबाजों जैसी इन तीन चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया था।
पिछले साल जम्मू-कश्मीर में 100 से ज्यादा ऑपरेशन चलाए गए थे। इनमें से 90 कश्मीर और 13 जम्मू में संचालित हुए थे। इन ऑपरेशनों में 225 आतंकी मारे गए हैं। कश्मीर में 207 और 18 आतंकी जम्मू में मारे गए। इस कार्रवाई में 62 जवान भी शहीद हुए। इनमें 44 जवान पैरामिलिट्री फोर्स और 16 जवान जम्मू-कश्मीर पुलिस के थे। अब वहां पर आतंकियों को भर्ती के लिए युवक नहीं मिल रहे हैं।
दिलबाग सिंह के लिए प्लस प्वाइंट यह भी माना जाता है कि उनके कार्यकाल के दौरान 2020 में आतंकियों की 143 घटनाएं सामने आई थीं। यह संख्या 30 साल में सबसे कम बताई गई है। 1990 में 4158 आतंकी घटनाएं हुईं थीं। गत वर्ष जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की 255 घटनाएं सामने आईं हैं। ये आंकड़ा 2019 की तुलना में 87 फीसदी कम है। 2019 में पत्थरबाजी की 1999 घटनाएं हुई थीं। साल 2020 में पत्थरबाजी के 1193 मामले सामने आए थे। साल 2018 में इनकी संख्या 1458 थी। 2017 में 1412 और 2016 में 2653 घटनाएं हुई थीं।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बसंत रथ ने पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह के खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत दी थी। ये मामला काफ़ी चर्चा में रहा था। रथ ने लिखा था कि मैं ये शिकायत सरकारी अधिकारी या पुलिस अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि निजी तौर पर कर रहा हूं। उन्होंने लिखा कि मैं उस व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए नहीं कह रहा हूं। मैं आपसे केवल इस पत्र को अपने थाने की डायरी में रखने के लिए कह रहा हूं। आईपीएस अधिकारी बसंत रथ ने लिखा, अगर मेरे साथ कुछ भी बुरा होता है, तो आप सभी को पता होना चाहिए कि आपको किसका नंबर डायल करना चाहिए।