उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद और विधानसभाओं में होने वाले अमर्यादित आचरण, हंगामा, व्यवधान आदि पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र खतरे में पड़ने लगता है। उन्होंने व्यवधानों की तुलना कोरोना महामारी से की।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश की विधायी संस्थाओं में होने वाले हंगामों पर चिंता प्रकट की है। उन्होंने कहा कि विधानसभाओं और संसद में हंगामा, गतिरोध और व्यवधान कोरोना महामारी की तरह है। उन्होंने कहा कि इससे देश के लोकतंत्र पर खतरा मंडराने लगता है। उन्होंने पुडुचेरी में 84वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन सत्र में कहा कि सदन का संचालन करने वाले पीठासीन अधिकारियों को मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकारियों का भी इस्तेमाल करना चाहिए। इससे पहले पुडुचेरी पहुंचने पर उपराष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद में हंगामा और कार्यवाही बाधित करने की योजना बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इशारों पर तख्तियां छपवाई जाती हैं। उपराष्ट्रपति के मुताबिक सदन में नारेबाजी के लिए भी रणनीति बनाकर हंगामे होते हैं। इन बातों में कुछ भी अब रहस्य जैसा नहीं। संसद में ऐसे अशोभनीय आचरण की कोई जगह हमारे देश के सिस्टम में नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं के प्रति कम होता जनता का भरोसा कैंसर जैसा है।