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Agniveer: अग्निवीर पर टूटे भरोसे को जोड़ना बना चुनौती, सरकार ने 24 दिन में दूसरी बार क्यों उतारे 'IPS' डीजी

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 24 Jul 2024 08:14 PM IST

सार

अग्निवीर पर टूटे भरोसे को जोड़ना, सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 'अग्निपथ' योजना को गलत बताते हुए लगातार सरकार पर हमलावर हैं। वे कह चुके हैं कि इंडिया गठबंधन की सरकार में इस योजना को खत्म कर दिया जाएगा।

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अग्निवीर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI


अग्निवीर पर टूटे भरोसे को जोड़ना, सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। बुधवार को सीआईएसएफ डीजी नीना सिंह ने अपने बयान में कहा है, गृह मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय के तहत सीआईएसएफ, पूर्व-अग्निवीरों को बल में नियुक्त करने के लिए तैयार है। इन्हें कॉंस्टेबल पद पर नियुक्ति में 10 प्रतिशत आरक्षण और आयु व शारीरिक दक्षता परीक्षा में भी रियायत मिलेगी।


रेलवे सुरक्षा बल के डीजी मनोज यादव ने कहा, वे पूर्व-अग्निवीरों को आयु सीमा में रियायत और पीईटी से छूट के साथ बल में शामिल करने के लिए बेहद उत्साहित हैं। महानिदेशक ने कहा, ये महत्वपूर्ण कदम सुरक्षाबलों को मजबूती प्रदान करेगा।


बीएसएफ डीजी नितिन अग्रवाल ने कहा, यह बल 4 साल के अनुभव वाले पूर्व-अग्निवीरों को नियुक्ति देने के अनुकूल मानता है। इन्हें बल में 10 प्रतिशत आरक्षण व आयु में रियायत दी जाएगी। पीएम मोदी के नेतृत्व व गृह मंत्री के मार्गदर्शन में ये निर्णय बलों को मजबूत करेगा। एसएसबी डीजी दलजीत चौधरी ने कहा, एसएसबी ने भर्ती नियमों में बदलाव कर पूर्व-अग्निवीरों को बल में नियुक्ति के लिए आयु और शारीरिक दक्षता परीक्षा में रियायत देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से लाखों पूर्व-अग्निवीरों को आजीविका और बलों को प्रशिक्षित मैनपावर मिलेगी। 


सीआरपीएफ डीजी अनीश दयाल सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री द्वारा और गृह मंत्री के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक निर्णय के तहत, सीआरपीएफ पूर्व-अग्निवीरों को बल में नियुक्ति में 10 प्रतिशत आरक्षण और आयु सीमा में रियायत देगा। इस कदम से बल के लिए प्रशिक्षित मैनपावर सुनिश्चित होगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव चर्चा के दौरान अग्निवीरों का मुद्दा उठाया था। बतौर नेता प्रतिपक्ष, राहुल ने अग्निवीरों को लेकर सरकार पर कड़ा प्रहार किया था। उसके बाद विपक्ष के दूसरे नेताओं ने भी अग्निवीरों पर आवाज बुलंद की। 


राहुल गांधी ने कहा था, अग्निवीर, लैंडमाइन ब्लास्ट में शहीद होता है तो मैं उसे शहीद कह रहा हूं, मगर भारत सरकार उसे शहीद नहीं कह रही है। एक शहीद को पेंशन मिलेगी और शहीद का दर्जा भी मिलेगा, दूसरे को यह सब नहीं मिलेगा। तब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल की इस बात पर कहा था कि वे गलत बयानबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अग्निवीरों को सेवा के दौरान ग्रेज्युटी के अलावा अन्य लाभ न मिलने और उनके परिवार को पेंशन से वंचित करने की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने दावा किया था कि सरकार अग्निवीरों को इस्तेमाल करके उन्हें फेंक देने वाले मजदूर के रूप में देखती है। उन्हें शहीद का दर्जा भी नहीं देती। 


राहुल के बयान के तीन दिन बाद ही केंद्र सरकार ने सीआरपीएफ, बीएसएफ और सीआईएसएफ के महानिदेशकों को मैदान में उतारा था। इन बलों के डीजी ने अपने वीडियो संदेश में कहा था, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ में सिपाही के 10 प्रतिशत पद भूतपूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर दिए हैं। अग्निवीरों को केंद्रीय पुलिस बलों में नौकरी भी मिलेगी। उन्हें फिजिकल टेस्ट में छूट दी जाएगी। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने अग्निवीरों के आरक्षण फार्मूले पर सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा, सेना में बतौर 'अग्निवीर' भर्ती हुए युवाओं को क्या चार साल बाद गारंटी से सरकारी नौकरी मिल पाएगी। चौधरी ने अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण, इसे 2 करोड़ रोजगार की तरह एक जुमला बताया है। उन्होंने कहा, जब मोदी सरकार 15 साल के प्रशिक्षित जवान को नौकरी नहीं दे पा रही, तो महज 4 साल के प्रशिक्षित अग्निवीर को नौकरी कैसे दे सकेगी। क्या 10वीं पास अग्निवीर युवा 4 साल बाद किसी सरकारी नौकरी का पेपर पास कर पाएगा। 
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डीजीआर रिपोर्ट, जून 2021 के अनुसार, देश में पूर्व सैनिकों के 95 प्रतिशत (7.70 लाख) आरक्षित पद खाली क्यों पड़े हैं। जब मोदी सरकार 15 साल के प्रशिक्षित जवान को नौकरी नहीं दे पा रही है तो महज 4 साल की सेवा के बाद रिटायर होने वाले प्रशिक्षित अग्निवीर को नौकरी कैसे देगी। बतौर कर्नल रोहित चौधरी, केंद्र सरकार अग्निवीर को फिजिकल व मेडिकल में छूट देने की बात कर रही है, लिखित परीक्षा में क्यों नहीं। क्या लिखित परीक्षा में पूर्व सैनिक व अग्निवीर जवान मिनिमम पासिंग मार्क्स 40 प्रतिशत ला सकते हैं। यहां पर एक अहम सवाल यह भी है कि देश में शहीद हुए 15 अग्निवीरों में से 9 केस सुसाइड व संदिग्ध हालात में मौत के क्यों हैं। ये बहुत भयावह स्थिति है कि एक साल के अंदर 15 अग्निवीर शहीद हो चुके हैं।


बतौर चौधरी, 9 से ज्यादा केसों में अग्निवीरों की सुसाइड व संदिग्ध हालात में मौत हुई है। सेना में अग्निवीर जवान लगातार सुसाइड क्यों कर रहे हैं। क्या अग्निवीरों को पर्याप्त ट्रेनिंग मिल पा रही है। क्या छह महीने का प्रशिक्षित अग्निवीर सेना में काम करने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम है। पिछले एक साल में कितने 'सामान्य' सैनिकों ने सुसाइड किया है। उक्त अवधि के दौरान कितने 'अग्निवीर' सैनिकों ने सुसाइड किया। सरकार, संसद में श्वेत पत्र लेकर आए कि अग्निवीर सैनिक व रेगुलर सैनिक में भेदभाव क्यों है।

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