संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत के एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2013 से शुरू होने वाले 10 साल की अवधि के दौरान भारत में अत्यधिक गर्मी और लू लगने से 10,635 लोगों की जान गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की तरफ से निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों में सुधार के लिए उठाए गए कदमों से हीटवेव समेत मौसम की घटनाओं के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिली है।
कांग्रेस सांसद के सवाल का जितेंद्र सिंह ने दिया जवाब
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पूछा कि क्या सरकार हीटवेव को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव रखती है। जिस पर केंद्रीय मंत्री ने जवाब दिया कि 15वें वित्त आयोग ने मौजूदा अधिसूचित सूची में और अधिक आपदाओं को शामिल करने के मुद्दे पर विचार किया था। मंत्री ने लोकसभा को बताया कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट के पैरा 8.143 में पाया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया शमन निधि और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया शमन निधि से वित्त पोषण के लिए पात्र अधिसूचित आपदाओं की सूची काफी हद तक राज्य की जरूरतों को पूरा करती है और इसलिए इसके दायरे को बढ़ाने के अनुरोध में ज्यादा योग्यता नहीं पाई गई।
फिलहाल आपदा की सूची में शामिल हैं 12 आपदाएं
वर्तमान में, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि या राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (एसडीआरएफ) सहायता के लिए पात्र आपदाओं की अधिसूचित सूची में 12 आपदाएं शामिल हैं - चक्रवात, सूखा, भूकंप, आग, बाढ़, सुनामी, ओलावृष्टि, भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटना, कीट हमला, और पाला और शीत लहर।
राज्यों ने आयोग से किया था अनुरोध
बता दें कि राज्यों ने पहले आयोग से अनुरोध किया था कि हाथियों के हमले, बिजली गिरने, खनन से संबंधित आग लगने के खतरे, सांप के काटने, लू, नदी और तटीय कटाव, तथा जापानी इंसेफेलाइटिस, निपाह और कोविड-19 महामारी जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं को एसडीआरएफ और एनडीआरएफ से वित्तीय सहायता के लिए पात्र आपदाओं की सूची में शामिल किया जाए।
पिछले 10 सालों में किस राज्य में कितनी मौतें?
मंत्री ने यह भी बताया कि 2013 से शुरू होने वाले 10 साल की अवधि के दौरान देश में अत्यधिक गर्मी या हीटस्ट्रोक के कारण 10,635 मौतें दर्ज की गईं। इस अवधि के दौरान, आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 2,203 मौतें दर्ज की गईं, उसके बाद उत्तर प्रदेश (1,485), तेलंगाना (1,172), पंजाब (1,030), बिहार (938), महाराष्ट्र (867), ओडिशा (609), झारखंड (517), हरियाणा (461), पश्चिम बंगाल (357), राजस्थान (345), गुजरात (263) और मध्य प्रदेश (213) का स्थान रहा। दिल्ली में ऐसी 13 मौतें हुईं। देश में सबसे अधिक मौतें 2015 में 1,908 दर्ज की गईं।