सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गांधी परिवार के वकील से कहा कि यदि व्यक्तियों के बीच क्रॉस लेनदेन होता है तो एक केंद्रीकृत मूल्यांकन की आवश्यकता हो सकती है। शीर्ष अदालत कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और उनसे जुड़े ट्रस्टों उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में उनके आयकर मूल्यांकन को कर चोरी की जांच करने वाले सेंट्रल सर्किल में स्थानांतरित करने के आदेश को चुनौती दी गई है। गांधी परिवार, संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट एंड राजीव गांधी फाउंडेशन, जवाहर भवन ट्रस्ट एंड यंग इंडियन की ओर से वरिष्ठ वकील अरविंद दतार सुनवाई में पेश हुए।शीर्ष अदालत ने साथ ही आम आदमी पार्टी की ओर से उसका मामला सेंट्रल सर्किल को भेजने के खिलाफ अपील दाखिल करने में पांच महीने की देरी पर भी सवाल उठाया। जस्टिस खन्ना ने आप के वकील अभिषेक सिंघवी से कहा, इस तरह के मामले में एक महीने का विलंब भी घातक हो सकता है। आपको बताना होगा कि आखिर इतनी देर क्यों हुई। जस्टिस खन्ना ने कहा कि हम दोनों मामलों को अलग अलग सुनेंगे।
पीठ ने आयकर विभाग का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बलबीर सिंह से पूछा कि क्या फेसलेस मूल्यांकन अधिकारियों के मामले में समीक्षा और सत्यापन समिति का चयन कंप्यूटर करता है। जस्टिस खन्ना ने सिंह से कहा, मैं स्पष्टीकरण नहीं, बल्कि तथ्यात्मक उत्तर चाहता हूं। साथ ही कार्यवाही का चरण भी जानना चाहेंगे। कृपया आप मामले की मूल फाइलें प्राप्त करें।
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट के 26 मई के साझा आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने अपने आईटी मूल्यांकन को सेंट्रल सर्कल में स्थानांतरित करने के आयकर विभाग के फैसले के खिलाफ गांधी परिवार की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने इसी तरह की संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट, जवाहर भवन ट्रस्ट, राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, यंग इंडियन और आम आदमी पार्टी की अलग-अलग याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था।