इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति और छात्रसंघ अध्यक्ष रिचा सिंह से जुड़ा विवाद संसद पहुंच गया है। जनता दल यूनाइटेड के सांसद केसी त्यागी ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्य प्रहर के दौरान यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि रोहित के बलिदान और कन्हैया एपिसोड के बाद अब यह मामला आगे बढ़ रहा है। रिचा के खिलाफ दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए हैं।
त्यागी ने महिला के विरुद्ध अपराध, लैंगिक असंवेदनशीलता और वीसी के सत्तावादी रवैये पर बात रखी। जदयू सांसद ने बताया कि रिचा ने उनसे मुलाकात की है। उसने इस मुद्दे पर सभी सांसदों को पत्र लिखा है। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि छात्र आंदोलन, छात्र स्वतंत्रता और छात्रों पर हमला नहीं होना चाहिए।
वह इस मसले को संबंधित मंत्री के संज्ञान में लाएंगे ताकि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किसी तरह का भेदभाव हुआ हो तो उचित कार्रवाई की जा सके।
किया जा रहा रिचा का चरित्र हनन
एबीवीपी संरक्षक की तरह काम कर रहीं स्मृति : विपक्ष
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दूसरी ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया कि हैदराबाद विश्वविद्यालय और जेएनयू के बाद एबीवीपी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का भगवाकरण करना चाहती है। पार्टी ने भाजपा और संघ को विश्वविद्यालय से दूर रहने के लिए कहा है।
सीपीआई के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष रिचा ने हाल ही में भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ को कैंपस में आने की इजाजत नहीं दी थी। इसी के बदले में अब उसका चरित्र हनन किया जा रहा है।
रोहित वेमुला और जेएनयू विवाद के बाद विपक्षी दलों ने अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय को लेकर सरकार को निशाना बनाया है। कांग्रेस, लेफ्ट और आप समेत आठ दलों ने मंगलवार को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी एबीवीपी के संरक्षक की तरह काम कर रही हैं। दलों ने मोदी सरकार पर रिचा सिंह को परेशान करने का आरोप लगाया है। बयान पर जनता दल यूनाइटेड, सपा, डीएमके और राजद के भी हस्ताक्षर हैं।