चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण से वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली थी। नासा ने बताया था कि चंद्रयान-1 चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों के अंधेरे और ठंडे हिस्सों में बर्फ है। सतह पर कुछ मिलीमीटर तक बर्फ मिलने से यह संभावना बनती है कि उस बर्फ का इस्तेमाल भविष्य की चंद्र यात्राओं में संसाधन के रूप में किया जा सकता है। जर्नल पीएनएएस में प्रकाशित शोध के मुताबिक यह बर्फ कुछ-कुछ दूरी पर है और संभवत: बहुत पुरानी है।
इससे दुनिया के सामने भारत की साख और भी मजबूत हुई है। इससे पहले चंद्रयान ने ही चांद पर पानी होने की भी पुष्टि की थी। भारत के इस यान से चांद की सतह पर कुछ मिलीमीटर और भी पानी मौजूद हो सकता है। यान से मिली यह जानकारी वैज्ञानिकों के लिए काफी आवश्यक है। इससे चांद पर भेजे जाने वाले मिशन में सहायता मिलेगी।
जानकारी मिली थी कि चांद के दक्षिण पोल पर जो गड्ढे मौजूद हैं उनमें बर्फ है। इसके अलावा उत्तर पोल पर भी चौड़ी बर्फ की जानकारी मिली है। अब वैज्ञानिक चंद्रयान से मिली जानकारी की पुष्टि नासा के मून मिनरलॉजी मैपर इंस्ट्रूमेंट से कर रहे हैं।
वहीं इसरो ने 2022 तक अंतरिक्ष में अपना पहला मानवयुक्त यान ‘गगनयान’ भेजने की रूपरेखा तैयार कर ली है। योजना के मुताबिक, 2022 तक भारत तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अपना पहला यान भेजेगा। इस योजना पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
2004 से ही तैयार किए जा रहे गगनयान को 15 अगस्त, 2022 तक अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य के मुताबिक, पहली बार तीन अंतरिक्षयात्रियों को 5-7 दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। गगनयान को धरती की सतह से 300-400 किमी की दूरी वाले कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
फरवरी 2021 और मार्च 2022 में दो मानवरहित गगनयान भी प्रयोग के तौर पर अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से इस योजना के बारे में ऐलान किया था।
तीन विशेषज्ञ लोगों के चयन के बाद उन्हें दो से तीन साल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अगर भारत अपने मिशन में कामयाब होता है तो ऐसा करने वाला वो दुनिया का मात्र चौथा देश हो जाएगा। अब तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही अंतरिक्ष में अपना मानवयुक्त यान भेजने में सफलता पाई है।