मिशन चंद्रयान-3 की सफलता से इसरो खूब उत्साहित है। इस बीच, इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने गुरुवार को एक बयान में चंद्रयान मिशन के भविष्य को लेकर भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रमा को लेकर अभी दिलचस्पी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में बोलते हुए कहा कि इसरो अब चंद्रमा की सतह से कुछ चट्टानों के नमूने लाने की योजना बना रही है।
राष्ट्रपति भवन विमर्श श्रृंखला के तहत राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में व्याख्यान देते हुए उन्होंने वहां मौजूद लोगों के सामने चंद्रमा से चट्टानों को वापस लाने के लिए 'सैंपल रिटर्न मिशन' के बारे जानकारी साझा की। इसरो प्रमुख ने कहा, 'चांद पर हमारी रुचि अभी खत्म नहीं हुई है। मैं राष्ट्रपति जी को आश्वासन देता हूं कि हम खुद कुछ चंद्रमा की चट्टानें लाएंगे।' उन्होंने आगे कहा कि हालांकि यह आसान मिशन नहीं होगा। इसमें कोई इंसान शामिल नहीं होगा। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हम अभी जितनी तकनीक पर काम कर रहे हैं, इसके लिए उससे ज्यादा की जरूरत होगी। एस सोमनाथ ने आगे कहा कि हम फिलहाल इस तरह का एक मिशन डिजाइन कर रहे हैं। हम इसे अगले चार साल में करना चाहेंगे। यही हमारा लक्ष्य है।
मानव को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन पर चल रहा काम
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी मानव को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन पर काम कर रही है। इसके लिए सर्विस और क्रू मॉड्यूल डिजाइन कर लिया गया है। इसरो प्रमुख ने आगे कहा कि हम उन्हें बहुत सुरक्षित तरीके से अंतरिक्ष में ले जाएंगे और उन्हें सुरक्षित वापस भी लाएंगे।
अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की जताई इच्छा
इस बीच, उन्होंने कहा कि हमारी योजना एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी तैयारियों की समीक्षा की है। उन्होंने पहले ही 2035 तक एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत एक ऑपरेशनल स्पेस स्टेशन बनाया जाएगा। जहां इंसान जा सकते हैं और काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसरो अंतरिक्ष स्टेशन बनाने से पहले इसका पहला मॉड्यूल 2028 तक लॉन्च किया जाएगा और वह एक रोबोटिक अंतरिक्ष स्टेशन होगा। मानवयुक्त अंतरिक्ष स्टेशन के लिए हमें 2035 तक का इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य देश में अंतरिक्ष गतिविधियों को अर्थव्यवस्था के पैमाने पर काफी ऊपर तक विस्तारित करना है।