भारत की प्रतिभा वैश्विक स्तर पर धाक जमा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 2028 तक पहला- 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' स्थापित करने पर नजरें हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि संस्था, मौजूदा लॉन्चर क्षमता का इस्तेमाल कर, पहला 'भारतीय अंतरराष्ट्रीय स्टेशन' 2028 तक स्थापित करना चाहती है। उन्होंने 10वें वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के दौरान ISRO ने अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य के बारे में बात की।
खगोल जगत से जुड़े रिसर्च होंगे; 2035 तक अंतरिक्ष में होंगे इंसान
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर आयोजित सेमिनार में इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा कि पहला भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने में सफलता के बाद हम इसे आपके (अंतरिक्ष वैज्ञानिक) आने और प्रयोग करने के लिए एक प्रयोगशाला के रूप में भी विकसित करना चाहेंगे। इसरो प्रमुख ने सवाल किया, वे कौन लोग हैं जो एक निश्चित अवधि में आकर भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन में प्रयोग करेंगे? उन्होंने कहा कि 2035 तक हम मानवों को अंतरिक्ष में भेज सकेंगे। हमारे पास प्रयोगशालाएं, संस्थान, वैज्ञानिक प्रतिष्ठान होंगे, जहां खगोल जगत से जुड़े रिसर्च किए जा सकेंगे।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का उपयोग कैसे होगा
इसरो चीफ ने कहा कि आने वाले दिनों में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन से बहुत लाभ मिलेगा। इससे आर्थिक परिणाम भी हासिल किए जा सकेंगे। सोमनाथ ने कहा, देश का पहला अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने के बाद, इसरो कंपनियों और संस्थानों की तलाश भी करेगा। वैसी कंपनियों को खोजा जाएगा जो भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का उपयोग कर आर्थिक गतिविधियां शुरू कर सकें। उन्होंने भरोसा जताया कि इसरो के लिए यह हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य है।
चांद पर इंसानों के पहुंचने का आर्थिक असर होगा
सोमनाथ ने कहा कि चंद्रमा तक इंसानों के पहुंचने का आर्थिक प्रभाव भी पड़ेगा। भविष्य में रणनीतिक गतिविधियां केवल धरती के आसपास नहीं होने वाली। इसरो प्रमुख के मुताबिक उद्योग जगत को अगले 5-10 वर्षों में सैकड़ों अंतरिक्ष यान बनाने होंगे। इनकी मदद से अंतरिक्ष से कई काम किए जाने की जरूरत है। ऐसा करने से उद्योग जगत को अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास में योगदान देने का अवसर मिलेगा।
5-10 साल में सैकड़ों अंतरिक्ष यानों की जरूरत
उन्होंने कहा, पिछले एक साल में इसरो के पास कृषि, मौसम पूर्वानुमान, आपदा चेतावनी, जल संसाधन, कार्टोग्राफी, रणनीतिक और खुफिया जानकारी जुटाने के क्षेत्र से डिमांड आई है। अगले 5-10 वर्षों में सैकड़ों अंतरिक्ष यानों की जरूरत होगी। देशभर से मांग आई है। इसरो ने इन क्षेत्रों की पहचान कर ली है। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि निजी कंपनियां कम लागत में कैसे प्रभावी काम कर सकेंगी? इस सवाल के पहलुओं को समझने की जरूरत है।