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Israel Hamas war: ISIS, तालिबान और बोको हराम खोलेंगे इस्राइल के खिलाफ मोर्चा! चेचन्या भी कर रहा तैयारी

आशीष तिवारी
Updated Thu, 12 Oct 2023 02:29 PM IST

सार

Israel Hamas war: विशेषज्ञों के मुताबिक इस्राइल के खिलाफ इस वक्त तीन तरफ से बड़ी घेरेबंदी के चलते अन्य मुस्लिम देशों को लामबंद करके इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और युद्ध का माहौल तैयार करने के लिए चेचन्या की उकसाने की योजना ने न सिर्फ काम करना शुरू किया है, बल्कि अपने नेटवर्क को भी सक्रिय कर दिया है...
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Israel Hamas war - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht


दुनिया भर की तमाम खुफिया एजेंसियों की ओर से चेचन्या के खतरनाक मंसूबों को डिकोड करने के बाद पता चला है कि अखमदोविच कादीरव्य की और से मुस्लिम देशों को एक संदेश भेजा गया। जिसमें कहा गया है कि वह न सिर्फ फिलिस्तीन के साथ खड़े होकर इस लड़ाई में उनका साथ दें, बल्कि उन देशों को भी संदेश देने की प्रक्रिया में लग जाएं, जो लोग लगातार फिलिस्तीन का साथ दे रहे हैं। इसमें अमेरिका समेत पश्चिम के उन तमाम देशों का जिक्र भी किया गया है, जो इस्राइल का न सिर्फ साथ दे रहे हैं, बल्कि सैन्य मदद भी उपलब्ध करवा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक चेचन्या के नेता ने अपने करीबी यूरोपीय देशों से एक अपील जरूर की है कि वह इस लड़ाई में या तो इस्राइल की ओर से हो रही गोलाबारी को बंद करवाएं या फिर वह उनका साथ देना छोड़ दें।

दुनिया के मुस्लिम देशों को भेजे गए संदेश में चेचन्या ने कहा कि मुसलमानों का वर्चस्व नष्ट करने के लिए पश्चिमी देशों ने फिलिस्तीन पर इस्राइल के माध्यम से हमला करवाने की पूरी साजिश रची है। इसलिए इस लड़ाई में सभी मुस्लिम देश को एकजुट होकर फिलिस्तीन के पक्ष में न सिर्फ खड़े होना चाहिए, बल्कि शांति की अपील कर इस युद्ध को रोकने के सभी प्रयास करने चाहिए। चेचन्या के नेता रमजान अखमदोविच कादीरव्य ने अपने संदेश में यह तक कहा पश्चिमी देशों के दबाव के चलते मुस्लिम देश अब कहीं भी प्रार्थना तक करने से डरते हैं। यही नहीं अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए भी उनके ऊपर चौतरफा पश्चिमी देशों के हमने शुरू हो जाते हैं। इस्राइल और हमास के बीच शुरू हुई लड़ाई को लेकर चेचन्या के नेता ने कहा कि आप सभी मुस्लिम देशों को एकजुट होकर अपनी आवाज को मजबूती से उठाने के लिए आगे आना होगा। जानकारी के मुताबिक इसके लिए बाकायदा चेचन्या ने अपने नेटवर्क के माध्यम से मुस्लिम देशों के प्रमुख नेताओं और विद्रोही गुटों से संपर्क किया है।

इस दौरान चेचन्या की ओर से सीरिया के युद्ध में मुस्लिम विद्रोही और मुस्लिम संगठनों की ओर से लड़ाई में शिरकत करने वालों को इस्राइल के विरोध में खड़े होने के लिए कहा गया है। जानकारों का कहना है कि चेचन्या ने इस दौरान उन सभी मुस्लिम आतंकी संगठनों को भी एक तरह से निर्देश दिया है, जो लगातार अपने-अपने इलाकों में अस्थिरता का माहौल पैदा करते रहते हैं। इसमें तालिबान, हिज्बुल्लाह, आईएसआईएस, तहरीक ए तालिबान, बोको हरम, अल नुस्रा फ्रंट, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी, आरएएफ कोलंबिया समेत मुस्लिम देशों में सक्रिय आतंकी संगठनों को हमास की लड़ाई में शामिल होने का संदेश दिया गया है।

दुनिया भर की प्रमुख खुफिया एजेंजियों की ओर से चेचन्या की सक्रियता पर करीब से नजर भी रखी जा रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि चेचन्या की ओर से जिस तरीके हमास के आतंकियों के पक्ष में खड़े होने की बात की गई है, उससे यह स्पष्ट पता चलता है कि इसका पश्चिम एशिया और मध्य एशिया के विद्रोहियों को उकसाना अहम मकसद है। ताकि इस लड़ाई को पश्चिम एशिया के साथ-साथ मध्य पूर्व एशिया में भी आगे बढ़ाया जा सके। प्रोफेसर अभिषेक कहते हैं कि चेचन्या ने सिर्फ इसी स्तर पर ही मुस्लिम देशों को भड़काने के लिए ही सिर्फ संदेश नहीं प्रसारित किया है, बल्कि खुद को बतौर सैन्य शक्ति के तौर शांति स्थापित करने के लिए इस्राइल में जाने की भी अपील की है।

विदेशी मामलों के जानकार और पश्चिम एशिया के अलग-अलग देश में लंबे समय तक तैनात रहे वरिष्ठ अधिकारी देवेश चंद्रा कहते हैं कि जिस तरीके से चेचन्या ने मुस्लिम देशों को उकसाने और फलीस्तीन के पक्ष में खड़े होने की बात कही है, उससे निश्चित ही आने वाले समय में माहौल और बिगड़ सकता है। यही वजह है कि चेचन्या के नेता रमजान अखमदोविच कादीरव्य की और से मुस्लिम देश के लिए जारी किए गए बयान पर दुनिया के सभी देशों और खुफिया एजेंजियों की बड़ी नजर लग गई है। चंद्रा कहते हैं कि इस वक्त जिस तरह से इजरायल अपने ऊपर तीन तरफ से बड़े हमले झेल रहा है वह सिर्फ हमास का युद्ध या उसके समर्थन में की जाने वाली लड़ाई नहीं है। विदेशी मामलों के जानकार बताते हैं कि अगर चेचन्या जैसे देशों की अपील और आगे बढ़ती गई, तो इस्राइल और हमास के बहाने न सिर्फ युद्ध का दायरा बढ़ता जाएगा, बल्कि इसमें और कई देश धीरे-धीरे शामिल होकर इस लड़ाई को न सिर्फ लंबा खींचेंगे बल्कि बड़े दुष्परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं।

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