किसान नेता स्व. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की किसानी विरासत आखिर किसके हाथ में हैं? नरेश टिकैत या राकेश टिकैत? नरेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और राकेश प्रवक्ता, लेकिन दोनों के बयान एक दूसरे के विपरीत हैं। यह स्थिति तब है जब मीडिया को बयान देते समय राकेश टिकैत के पीछे नरेश टिकैत के बेटे गौरव अक्सर आकर खड़े हो जाते हैं। दोनों भाइयों की इस विपरीत केमिस्ट्री ने कई किसान संगठनों को हैरत में डाल दिया है। भाकियू (असली, अराजनैतिक) के नेता चौधरी हरपाल सिंह को भी यह माजरा समझ में नहीं आता। हरपाल तो यहां तक कहते हैं कि किसानों की ट्रैक्टर परेड का शिगूफा भी राकेश ने ही छोड़ा था।
नरेश टिकैत और राकेश टिकैत की केमिस्ट्री का एक दृश्य यह भी
गाजीपुर बार्डर पर किसान नेता सरदार वीएम सिंह अपने टेंट में अधलेटे थे। सरदार वीएम सिंह को राकेश टिकैत से बड़ी चिढ़ है। चिढ़ थोड़ी पुरानी भी हो चुकी है। कई बार वीएम सिंह ने नवंबर 2020 से चले किसान आंदोलन के दौरान भी फोन पर राकेश टिकैत की बुराई की। राकेश टिकैत का खेमा भी सरदार वीएम सिंह को मौजूदा सरकार के साथ पर्दे के पीछे से तालमेल रखने वाला नेता बताता है। उस दिन सरदार वीएम सिंह से मिलने नरेश टिकैत भी आए थे।
दोनों के बीच आंखों के इशारों से बात हुई। नरेश टिकैत के सामने ही सरदार वीएम सिंह ने राकेश के किसान राजनीति पर कुछ व्यंग बाण के लच्छे भी छोड़े। हालांकि कुछ किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत में राकेश टिकैत जाते हैं, सरदार वीएम सिंह को अनुमति नहीं मिल पाई। किसान संगठनों के विरोध के कारण भी वह रह गए। एक बड़े किसान नेता का कहना है कि सिंघु बार्डर से भी किसान संगठनों ने सरदार को उल्टे पांव लौटा दिया था।
नरेश कहते हैं गाजीपुर खाली करेंगे, राकेश गोली खाने के लिए तैयार
नरेश टिकैत ने लाल किला पर निशान साहिब फहराए जाने, केंद्र सरकार के रवैये और जांच-पड़ताल के तरीके पर सवाल उठाया। किसान हितों की बात की। इसके साथ उन्होंने गाजीपुर बार्डर से भाकियू के हटने की भी घोषणा कर दी। नरेश से इतर राकेश ने अलग लाइन ले रखी है। वह गाजीपुर बार्डर पर डटे हैं। रो- रहे हैं। केंद्र सरकार को कोस रहे हैं। लाल किला के दोषियों पर कार्रवाई न होन की बात कर रहे हैं। आत्महत्या की धमकी तक दे रहे हैं और कह रहे हैं कि वह नहीं हटेंगे।
राकेश के अनुसार गाजीपुर बार्डर पर वह और उनके समर्थक डटे रहेंगे। पुलिस चाहे तो गोली चलाए। एक दिलचस्प वाकया और है। सरदार वीएम सिंह ने गाजीपुर बार्डर को अपने समर्थकों के साथ खाली करने की घोषणा की, लेकिन उनके कई समर्थकों ने खाली करने से इनकार कर दिया। हालांकि सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी ने नरेश और राकेश दोनों से बात की। आंदोलन में किसान हित में डटे रहने और साथ देने का वादा किया।
दरअसल बाजी मार ले जाते हैं राकेश, मामला किसान नेताई का है
किसान आंदोलनों के जानकार कहते हैं कि महेन्द्र सिंह टिकैत की विरासत तो नरेश संभाल रहे हैं, लेकिन वाकपुटता, महफिल लूटने और मीडिया में बने रहने में राकेश माहिर हैं। इस कला में नरेश पिछड़ जाते हैं। बताते हैं राकेश की लोकप्रियता भी नरेश को टक्कर दे देती है। ऐसे में पूरा मामला किसान नेताई की झंडाबरदारी का है।