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Corona virus: क्या दोबारा कोरोना संक्रमण संभव है? यहां जानिए ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब

Fri, 09 Apr 2021 10:16 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • चिंता की बात तो यह है लोग पहले एक बार कोरोना पॉजिटिव चुके हैं और दोबारा इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं जो काफी चिंताजनक है
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new Corona strain - फोटो : iStock
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विस्तार
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कोरोना वायरस को एक साल से ऊपर का समय बीत गया। लेकिन एक पिछले 24 घंटों में आए एक लाख 26 हजार मरीजों ने चिंता बढ़ा दी है कि आखिर कब तक हम कोरोना की मार झेलेंगे। क्यों आखिर कोरोना वायरस की दूसरी लहर इतनी चिंताजनक साबित हो रही है। 

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चिंता की बात तो यह है लोग पहले एक बार कोरोना पॉजिटिव चुके हैं और दोबारा इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं जो काफी चिंताजनक है। लोगों की समझ नहीं आ रहा आखिर ये लोग दोबारा क्यों संक्रमित हो रहे हैं, ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब यहां हैं-

1- क्या पहले कोरोना हुआ था, दोबारा संक्रमण नहीं होगा?

अभी तक ऐसी कोई स्टडी सामने नहीं आई है जिससे पता चल सके कि कोविड-19 से उबर चुके लोग दोबारा संक्रमित नहीं हो सकते। इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। संक्रमण के संपर्क में आने से पैदा हुई प्रतिरोधक क्षमता कितने समय तक बनी रहेगी, इस पर निर्भर करता है व्यक्ति दोबारा संक्रमित होगा या नहीं। 

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अभी तक देखा गया है कि जो लोग ठीक चुके हैं, उनके शरीर में एंटीबॉडी और टी सेल्स दोनों शामिल हैं, जो कुछ समय के लिए सुरक्षा का संकेत देते हैं। वहीं अब तक देखा गया है कि कोविड19 की प्रतिरोधक क्षमता स्थायी नहीं हो सकती है।

170 से ज्यादा लोगों पर किए गए एक अध्ययन में जो गंभीर SARS-CoV(कोरोनावायरस का एक स्ट्रेन) से संक्रमित थे, उनमें सार्स आधारित एंटीबॉडी औसतन दो साल तक देखी गई। इसका मतलब ये है कि शुरुआती एक्सपोजर के तीन साल बाद SARS मरीजों को दोबारा संक्रमण होने की आशंका हो सकती है। कुल मिलाकर, यह नहीं पता है कि प्रतिरोधक क्षमता कितने समय तक बनी रहती है, इस बारे में जानकारी नहीं है। 

2-  पहले हो चुके संक्रमित व्यक्ति को नए वैरिएंट से खतरा है?

कोरोना के नए वैरिएंट्स ने वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। कई देशों में अलग-अलग वैरिएंट के कोरोना मरीज मिले हैं। इसमें बड़ा सवाल ये है कि पहले कोरोना से उबर चुके लोगों को नए वैरिएंट से कितना खतरा है, तो यह व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करेगा।  एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजीलियन वैरिएंट पहली बार अमेजन राज्य की राजधानी मनौस में देखा गया, जहां पिछले साल कोरोना वायरस से तीन चौथाई आबादी संक्रमित थी। इससे आबादी के एक बड़े हिस्से को बेसिक इम्युनिटी मिल चुकी थी, लेकिन इस साल संक्रमण की संख्या फिर से तेजी से बढ़ी है। 

3- भारत में दूसरी लहर का जिम्मेदार क्या नया वैरिएंट है?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 मार्च को बताया कि भारत में एक नए डबल म्यूटेंट वैरिएंट की पहचान की गई है। तो क्या मार्च से केस में बढ़त इसी का नतीजा है? विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत में डबल म्यूटेंट वैरिएंट- E484Q नया है,  जिसे देखा नहीं गया था और ये सिक्वेंस किए जा रहे 15-20% मामलों में पाया गया है। लेकिन ये इतनी ज्यादा संख्या में नहीं मिला है कि कुछ राज्यों में बढ़ रहे मामलों से इसका संबंध जोड़ा जा सके।



एक म्यूटेशन सेलेक्ट होने के बाद उस वायरस में एक और म्यूटेशन हो सकता है, ट्रिपल म्यूटेशन भी हो सकता है और एक अलग लीनिएज (वंशावली) बन सकती है। म्यूटेशन प्राकृतिक घटनाएं हैं। ये इसलिए होता है क्योंकि कुछ म्यूटेशन वायरस को फायदा पहुंचाते हैं। अगर म्यूटेशन वायरस के लिए हानिकारक होता, तो हम इसे नहीं देखते क्योंकि ये सर्वाइव नहीं कर पाता। 

4. क्या ये कोरोना वायरस कभी खत्म होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस के तेज संक्रमण पर लगाम तो लगेगी, लेकिन इसका ट्रांसमिशन निचले स्तर पर जारी रहेगा। वायरस एंडेमिक हो जाएगा। एंडेमिक किसी भौगोलिक क्षेत्र के भीतर आबादी में किसी बीमारी या संक्रामक एजेंट की निरंतर उपस्थिति या आम प्रसार के बारे में बताता है।

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