लश्करागाह समेत अन्य हिस्से में जारी है संघर्ष
तालिबान ने काबुल में अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन वह बाल-बाल बच गए। इसी तरह से हेलमंद प्रांत के लश्करागाह में अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों के साथ भीषण जंग जारी है। अफगानिस्तान की सेना ने तालिबानी लड़ाकों पर हवाई हमले करके उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है। जवाब में तालिबान ने भी रणनीति को बदलते हुए गुरिल्ला युद्ध पद्धति से जवाब देने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा और रणनीतिक मामले के जानकारों का कहना है कि अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच में यह आमने-सामने की लड़ाई की स्थिति ठीक नहीं है। इससे आगे न केवल शांति वार्ता प्रभावित होगी, बल्कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ती जाएंगी। अफगानिस्तान में काफी समय तक रहकर लौटे सूत्र का कहना है कि तालिबान के साथ टकराव की यह स्थिति दक्षिण एशिया में सुरक्षा की चिंताओं को काफी बढ़ा सकती है।
यही तो गृह युद्ध है
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि यही तो गृह युद्ध है। वहां तालिबान के लड़ाके प्रोफेशनल तरीके से अफगानिस्तान की सेना को जवाब दे रहे हैं। गंभीर सवाल यह भी है कि तालिबान के पास इतने खतरनाक हथियार आए कहां से? एसके शर्मा कहते हैं कि आतंकवादी के पास असाल्ट राइफल आदि हो सकती है। लेकिन तालिबानियों के पास हैवी मशीनगन और बड़े हथियार हैं। यह बिना किसी देश की सीधी मदद के संभव नहीं है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तान के पास तालिबानियों से निपटने के लिए हवाई हमले की भी पर्याप्त क्षमता नहीं है। उनके पास चार के करीब हेलीकाप्टर हैं। उनके पास कुछ संसाधन अमेरिका सेना द्वारा छोड़े गए हैं। केवल इतने के बल पर तालिबान के लड़ाकों का मुकाबला मुश्किल लग रहा है।