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Internet Addiction : कस्बों-गांवों तक पहुंची इंटरनेट की लत, हर जिले में चाहिए डी-एडिक्शन सेंटर

Sun, 31 Jul 2022 06:52 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Internet Addiction : बंगलूरू (Bangalore) स्थित राष्ट्रीय मानसिक जांच एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS)  और पुणे स्थित सिंबियोसिस यूनिवर्सिटी (Symbiosis University) के शोधार्थियों ने बताया, देश में बीते पांच वर्षों में सालाना डिजिटल दुनिया से जुड़ने वालों की संख्या 20 से 25 फीसदी बढ़ रही है।  
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मोबाइल में गेम खेलता बच्चा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Internet Addiction : इंटरनेट (Internet) और सोशल मीडिया (Social Media) की लत शहरों से निकलकर कस्बों-गांवों (Towns-Villages) तक पहुंच गई है। हर साल यूजर्स की संख्या करोड़ों में बढ़ती जा रही है। छोटे-छोटे बच्चों में भी ऑनलाइन वीडियो (Online Video) देखने की लत लग रही है। इसकी वजह से उनमें गंभीर अवसाद, अकेलापन और हिंसक व्यवहार (Violent Behavior) के लक्षण दिख रहे हैं। 

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विशेषज्ञों (Experts) के मुताबिक, इन्हें बचाने के लिए हर जिले में इंटरनेट नशामुक्ति केंद्र (Internet de-addiction center) (डी-एडिक्शन सेंटर) खुलना चाहिए। यहां न सिर्फ इंटरनेट, बल्कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) को लेकर काउंसलिंग (Counseling), निगरानी (Monitoring) और उपचार की सुविधा (Treatment facilities) मिले।

25% सालाना बढ़ रही डिजिटल से जुड़ने वालों की संख्या

  • निम्हांस और सिंबियोसिस यूनिवर्सिटी का संयुक्त अध्ययन में अनुमान
  • सोशल मीडिया सहित इंटरनेट की लत छुड़ाने में सबसे बड़े मददगार हैं केंद्र, विशेषज्ञों की तैनाती भी जरूरी
  • बंगलूरू स्थित राष्ट्रीय मानसिक जांच एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) और पुणे स्थित सिंबियोसिस यूनिवर्सिटी  के शोधार्थियों ने अध्ययन में बताया, देश में बीते पांच वर्षों में सालाना डिजिटल दुनिया से जुड़ने वालों की संख्या 20 से 25 फीसदी तक बढ़ रही है।  

चिंता : इंस्टा-स्नैपचैट पर बच्चे ज्यादा

  • फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट का बच्चे और किशोर अधिक कर रहे इस्तेमाल
  • मौजूदा समय में देश में 64.2 करोड़ है इंटरनेट यूजर्स  की संख्या
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mobile - new - फोटो : iStock
मानसिक स्वास्थ्य पर अधिकांश राज्यों की सुस्ती, अधिकारों से वंचित बच्चे व किशोर
  • 10 साल से भी छोटे बच्चे सक्रिय
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक रिपोर्ट में चिंता जताई है कि देश में 10 साल से कम उम्र के बच्चे भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।
  • 37.8% बच्चों का है फेसबुक अकाउंट  
  • 24.3% बच्चे इंस्टाग्राम पर हैं सक्रिय
राष्ट्रीय स्तर पर डाटा की जरूरत
निम्हांस के डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार देश में मौजूद क्लीनिक आबादी और इंटरनेट यूजर्स की तुलना में नाकाफी हैं। हर जिले में क्लीनिक हो। नई दिल्ली स्थित एम्स के वरिष्ठ मनोचिकित्सक और बिहेवियरल एडिक्शन सेंटर के प्रभारी डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा ने कहा, हर जिले में केंद्र शुरू होने से जमीनी स्तर पर सटीक जानकारी मिल पाएगी।

यूपी सहित कुछ ही राज्यों में केंद्र
भारत में पहला स्मार्टफोन नशा मुक्ति केंद्र जून 2014 में बंगलूरू में खोला गया था। दिल्ली एम्स, पुणे और हाल ही में यूपी के तीन जिलों और अमृतसर में भी एक केंद्र शुरू हुआ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
चिंता : रिश्तों-अवसरों को खो रहे  
  • नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में साल 2018 और 2019 के दौरान लगे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने 817 लोगों पर किया सर्वे।
  • इसमें 13.4% युवाओं ने माना, मोबाइल की लत में वे इस कदर जकड़ चुके हैं कि उन्होंने रिश्तों या अवसर को खतरे में डाला या उसे खो दिया है।
चार साल में एक अरब से ज्यादा होंगे यूजर
  • n    साल 2026 तक भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या एक अरब के पार होगी।
  • n    6:45 घंटे ऑनलाइन वीडियो कंटेंट रोजाना देखा जाता है विश्व में औसतन। भारत में यह करीब 8: 29 घंटे है।
  • n    हाल ही बंगलूरू में 26 साल के युवा मरीज की पहचान हुई, जो 7 से 10 घंटे ऑनलाइन वीडियो देखता था।
काउंसलिंग बेहतर
बच्चों और किशोरों को अवसाद से बाहर लाने के लिए दवाओं की बहुत कम जरूरत पड़ती है। अधिकांश मामलों में काउंसलिंग से ही काम चल जाता है। -डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा, एम्स
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