सार
दरअसल, करनाल जेल के बंदी जेल रेडियो के माध्यम से राखी का जश्न मनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि उनके परिवार के सदस्य भी जेल के कोने में बंद उनकी आवाजें सुनें। करनाल जेल में 29 अप्रैल 2021 को रेडियो शुरू हुआ था। आज रक्षा बंधन के मौके पर यह बड़ा हिट हुआ।
करनाल जेल रेडियो से राखी पर हुआ विशेष प्रसारण
- फोटो : amar ujala
देश की तमाम जेलों की तरह हरियाणा की करनाल जिला जेल के बंदी भी रक्षाबंधन के पर्व पर बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने राखी के मौके पर फरमाइशी गानों व कहानियों की इतनी मांग की कि करनाल जेल रेडियो का प्रसारण समय बढ़ाना पड़ गया।
करनाल जेल रेडियो का प्रसारण आज सुबह सात बजे नियमित समय पर शुरू हुआ, लेकिन बंदियों ने राखी के मौके पर असामान्य फरमाइशें कीं। कैदियों ने अपनी पसंद के कार्यक्रमों, कहानियों और गीतों को सुनने के लिए 300 से अधिक पत्र भेजे थे। कैदियों के उत्साह को देखते हुए जेल रेडियो को आज अपने तीन घंटे के तय समय की बजाए आठ घंटे तक प्रसारण करना पड़ा।
दरअसल, करनाल जेल के बंदी जेल रेडियो के माध्यम से राखी का जश्न मनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि उनके परिवार के सदस्य भी जेल के कोने में बंद उनकी आवाजें सुनें। करनाल जेल में 29 अप्रैल 2021 को रेडियो शुरू हुआ था। आज रक्षा बंधन के मौके पर यह बड़ा हिट हुआ। रक्षा बंधन के अवसर पर राखी से संबंधित 15 गीतों का विशेष रूप से पुनर्प्रसारण किया गया। यह उन सभी बंदियों के लिए खासतौर से सुकूनदायी रहा, जिन्होंने कोरोना काल के दौरान जेल में बेहद गुमनामी में समय बिताया। दो साल तक कोरोना महामारी के चलते जेलों में मुलाकातों पर भी लंबे समय तक पाबंदी थी।
बंदी ही चलाते है रेडियो, 10 कैदी हैं जॉकी
करनाल कारागार रेडियो से रोज छह घंटे कार्यक्रमों का प्रसारण होता है। इन कार्यक्रमों को चलाने के लिए पांच महिलाओं सहित 10 कैदियों को रेडियो जॉकी के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। जेल रेडियो शुरू करने में तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नंदा की अहम भूमिका है। करनाल जेल के दो कैदी तिनका तिनका जेल अनुसंधान प्रकोष्ठ का हिस्सा हैं।
2000 से ज्यादा परिजन बंदियों से मिलने पहुंचे
इस अवसर पर जेल अधीक्षक विशाल छिब्बर ने कहा कि राखी के मौके पर भाई-बहनों को समर्पित गीत सुनकर कैदी खुश थे। उन्होंने पूरे दिन गाने सुनने की मांग की थी। राखी के दिन बंदियों के परिवारों के 2000 से अधिक लोग आज जेल में बंद अपने भाइयों/बहनों से मिलने पहुंचे थे। उनकी मुलाकात व रेडियो पर भावुक गीतों के साथ यह यादगार दिन बन गया।