भारत में 72 सौ ईसा पूर्व नगरीय सभ्यता होने का पुख्ता प्रमाण मिला है
हरियाणा के फतेहाबाद के भिरडाणा में डॉ. मणि ने जब खुदाई कार्य शुरू किया तो उन्हें 72 सौ ईसा पूर्व सभ्यता विकसित होने का प्रमाण मिल गया है। यहां से निकली मिट्टी के नमूने यानी चारकोल कार्बन-14 की जांच हुई तो एक दम सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास 72 सौ ईसा पूर्व में पहुंच गया। भिरडाणा से 25 किलोमीटर दूर जब खुदाई की गई तो एक अन्य स्थल भी मिल गया। यह कुणाल में स्थित है।
यहां पर दो सीजन की खुदाई हो चुकी है। अब अक्टूबर में यहां पर खुदाई की तीसरा सीजन शुरू होगा। यहां की मिट्टी में पाए गए चारकोल-कार्बन 14 को अमेरिका की फ्लोरिडा लैब में भेजा गया है। जांच रिपोर्ट में छह हजार ईसा पूर्व सभ्यता होने के प्रमाण मिले हैं। कुछ जगहों पर 25 सौ से चार हजार ईसा पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी मिल रहे हैं।
डार्क एज...किताबों से अब यह चैप्टर हट जाएगा, सस्पेंस खत्म
अभी तक हमारे देश में डार्क एज को लेकर सस्पेंस बरकरार था। सामान्यत: इतिहास में 15 सौ ईसा पूर्व से लेकर 600 ईसा पूर्व के बीच के काल को डार्क एज माना गया है। कहा जाता है कि इस काल में हड़प्पा सभ्यता खत्म हो गई थी। इसे बुद्ध के आने से पहले का समय भी माना जा सकता है। इन एक हजार साल का कहीं किसी को कुछ नहीं मालूम था। जो चीजें छह सौ ईसा पूर्व से लेकर तीन सौ ईसा पूर्व के बीच मिली थी, अब वैसी वस्तुएं 15 सौ ईसा पूर्व, 1000 ईसा पूर्व, 900 और 800 सौ ईसा पूर्व में भी मिल रही हैं।
इटालियन मिशन ने कपिलवस्तु (नेपाल) में भी ऐसे ही कुछ अवशेष ढूंढ निकाले हैं। संग्रहालय के महानिदेशक बताते हैं कि न यूपी, न बिहार और न ही राजस्थान में डार्क एज बाबत कुछ मिल पा रहा था। अब हरियाणा में चल रही खुदाई के दौरान जो मिट्टी या अवशेष मिले हैं, उससे साबित हो गया है कि डार्क एज में भी सिंधु घाटी सभ्यता का अस्तित्व मौजूद था।
खास बात है कि डार्क एज की सभ्यता पता बताने वाली मिट्टी के चारकोल के सेंपल तीन लैब अमेरिका, दिल्ली और लखनऊ में भेजे गए थे। तीनों ही लैब से एक जैसी रिपोर्ट प्राप्त हुई है। आने वाले समय में स्टूडेंट को इतिहास की किताबों में डार्क एज के सस्पेंस का सामना नहीं करना पड़ेगा।