इंदौर-पटना ट्रेन जब पटरी से उतरी तो उसने कईयों को तुरंत ही मौत की नींद सुला दिया। हादसे में मरने वालों का आंकड़ा अभी भी बढ़ रहा है। ऐसे में कई सवाल हैं जो रेलवे की तरफ भी उठ रहे हैं।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इंदौर-पटना एक्सप्रेस में शनिवार के दिन लगभग 1200 लोग सवार हुए थे। वहीं सूत्र इस आंकड़े से कहीं ज्यादा यात्रियों के ट्रेन में सवार होने की बात कहते हैं। सैकड़ों यात्री ट्रेन के अंदर जनरल टिकट या फिर बिना टिकट यात्रा कर रहे थे।
रेलवे के दावों के विपरीत नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी कहते हैं कि 'इन यात्रियों का आंकड़ा लगभग 500 के करीब हो सकता है'। इन दावों को मजबूत करते हैं राजाराम। वो रविवार को इंदौर रेलवे स्टेशन पर अपनी बहन को खोजते नजर आते हैं।
कई यात्री ऐसे थे जिनका ट्रेन में टिकट नहीं था
हादसा
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राजाराम को ये तो पता है कि उनकी बहन शनिवार को ट्रेन में सवार हुई थी, लेकिन उन्हें उसके कोच के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसका कारण ये है कि उनकी बहन वेटिंग टिकट के साथ इंदौर-पटना एक्सप्रेस में यात्रा कर रही थी।
'वो 296 वेटिंग लिस्ट के साथ ट्रेन में मौजूद थीं, मैंने किसी एक कोच में उन्हें छोड़ा था। राजा रोते हुए बताते हैं कि उन्हें नहीं पता कि वो कहां हैं, कहीं कोच में उनकी मौत तो नहीं हो गई। राजा अकेले ऐसे शख्स नहीं है जिनकी बहन अवैध टिकट के साथ पटना-इंदौर ट्रेन में यात्रा कर रही थीं।
हेल्प डेस्क पर मौजूद अधिकारी बताते हैं कि ऐसे कई यात्री पूछताछ काउंटर पर आ रहे हैं जिनके संबंधियों का ट्रेन में आरक्षण नहीं था। वो अवैध टिकट के साथ ही ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। इससे साफ जाहिर होता है कि ट्रेन के भीतर ऐसे सैकड़ों यात्री और मौजूद थे जिन्हें आरक्षण नहीं मिल सका था।
अन्य दिनों की अपेक्षा थी ज्यादा भीड़
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स्टेशन पर मौजूद वेंडर्स भी दावा करते हैं कि शनिवार को अन्य दिनों और ट्रेनों की अपेक्षा इंदौर-पटना एक्सप्रेस में ज्यादा यात्री मौजूद थे। हालांकि रेलवे ने भीड़ ज्यादा होने की वजह से ट्रेन में अतिरिक्त डिब्बों की व्यवस्था तो की थी, लेकिन वो भी नाकाफी रही।
एक वेंडर के मुताबिक 'बहुत सारे लोग थे जो जनरल डिब्बे के अंदर यात्रा करने के लिए लंबी लाइन में थे। ये संख्या कोच की क्षमता से बेहद ज्यादा थी'। यही वो इकलौती ट्रेन है जो पटना से इंदौर को जोड़ती है। इसमें यूपी और बिहार के सैकड़ों लोग सफर करते हैं। ज्यादातर इसके डिब्बे पूरी तरह भरे रहते हैं।
रेलवे के अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि इस ट्रेन के जनरल डिब्बों में भारी भीड़ होती हैं। पश्चिम रेलवे के एक अधिकारी कहते हैं कि जनरल बोगी में 90 लोगों की जगह होती है, लेकिन इन ट्रेनों में हमेशा भीड़ कहीं ज्यादा होती है।