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मिजोरम: फ्लाइट में बिगड़ी महिला की हालत, लैंडिंग के बाद भी मरीज का नहीं छोड़ा साथ, कैसे मसीहा बने चार डॉक्टर?

Mon, 05 Oct 2026 05:33 PM IST
अमन मौर्या पीटीआई, आइजोल, मिजोरम

सार

दिल्ली से आइजोल जा रही इंडिगो की उड़ान में क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित एक महिला मरीज का ऑक्सीजन लेवल 40 प्रतिशत तक गिर गया। फ्लाइट में मौजूद चार डॉक्टरों ने त्वरित इलाज कर उसकी जान बचा ली।
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इंडिगो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली से आइजोल जा रही इंडिगो की एक उड़ान में तीन अक्तूबर को एक 32 वर्षीय महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। महिला क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित थी। उसका दिल्ली में डायलिसिस चल रहा था और वह इलाज के बाद मिजोरम लौट रही थी। उड़ान के दौरान ही अचानक उसको सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई और ऑक्सीजन सैचुरेशन करीब 40 प्रतिशत तक गिर गया। यात्री की किस्मत अच्छी थी कि विमान में मिजोरम के तीन डॉक्टर और राज्य के बाहर के एक सीनियर मेडिकल प्रैक्टिशनर मौजूद थे। केबिन क्रू द्वारा मेडिकल मदद के लिए इमरजेंसी अनाउंसमेंट करने के बाद वे तुरंत हरकत में आ गए।
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डॉक्टर ने क्या बताया?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. बेंजामिन खियांगटे, पीडियाट्रिशियन और क्रिटिकल-केयर सुपर-स्पेशलिस्ट डॉ. एफ. रेमथांगपुई (जिन्हें अरेमी भी कहा जाता है) और जनरल सर्जन डॉ. विली लालह्रुइटलुआंगा ने मदद के लिए कदम बढ़ाया। उन्होंने पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भागवत किशनराव कराड के साथ मिलकर काम किया। खियांगटे ने मीडिया को बताया कि बीच रास्ते में करीब आइजोल में उड़ान उतरने से करीब एक घंटे पहले, उसे अचानक मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ा और उसकी हालत बिगड़ गई।
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क्रू मेंबर ने मांगी सहायता
खियांगटे ने बताया कि मिजोरम के लिए भाजपा के नए नियुक्त प्रभारी नेता कराड, जो उसी उड़ान में यात्रा कर रहे थे, ने शुरू में करीब 30 से 35 मिनट तक महिला की देखभाल की थी, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसलिए केबिन क्रू ने अनाउंसमेंट करके पूछा कि क्या विमान में कोई डॉक्टर है। इस पर, मैं अपने दोस्तों डॉ. अरेमी और डॉ. विली के साथ मदद के लिए आगे आया।' डॉक्टरों ने पाया कि महिला का एसपीओटू लेवल करीब 40 प्रतिशत था, उसे सांस लेने में बहुत ज्यादा समस्या हो रही थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने मरीज को इनहेलर और ऑक्सीजन दी, लेकिन विमान के ऑक्सीजन सिलेंडर की क्षमता कम होने के कारण उससे प्रति मिनट केवल चार लीटर ऑक्सीजन ही मिल पा रही थी। उन्होंने बताया कि स्टेरॉयड देने के बाद, मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन कुछ समय के लिए बढ़कर लगभग 70-80 प्रतिशत हो गया।

मेडिकल इमरजेंसी में क्या-क्या हुआ?
मरीज का ऑक्सीजन लेवल फिर से गिर गया और डॉक्टर इमरजेंसी इंट्यूबेशन के बारे में सोचने लगे। लेकिन विमान में इस प्रक्रिया के लिए जरूरी उपकरण नहीं थे। इसलिए डॉक्टरों ने क्रू से लेंगपुई एयरपोर्ट पर एम्बुलेंस और मेडिकल सपोर्ट का इंतजाम करने को कहा। डॉ. खियांगटे के अनुसार, जब विमान उतरा, तो एयरपोर्ट पर मौजूद एम्बुलेंस में ऑक्सीजन तो थी, लेकिन उसमें एडवांस्ड रेस्पिरेटरी सपोर्ट देने के लिए जरूरी उपकरण नहीं थे। मरीज को सीधे लेंगपुई कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया। वहां उन्हें जरूरी इमरजेंसी उपकरण मिल गए और उन्होंने तुरंत स्ट्रेचर पर ही मरीज का इंट्यूबेशन किया। इंट्यूबेशन एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर मुंह या नाक के जरिए एक लचीली ट्यूब को श्वास नली में डालते हैं जिससे कि एयरवे खुला रहे और मरीज को सांस लेने में मदद मिले।

अब कैसी है हालत?
यहां पर डॉक्टरों ने आइजोल में आईसीयू बेड की खोज की। जब मरीज की हालत सीएचसी में स्थिर की जा रही थी, तब तक उन्होंने अस्पतालों से संपर्क किया और आखिरकार एलआरएम अस्पताल में आईसीयू बेड का इंतजाम कर लिया। डॉ. विली और डॉ. रेमथांगपुई एम्बुलेंस में मरीज के साथ आइजोल गए, जबकि डॉ. खियांगटे शहर जाने से पहले अपना सामान लेने के लिए एयरपोर्ट लौट गए। मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और बाद में डायलिसिस किया गया।
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कौन हैं डॉ. खियांगटे?
डॉ. खियांगटे मिजोरम के जाने-माने और प्रमुख गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट में से एक हैं, जो आइजोल के मिशन वेंग में अपना जीआई और लिवर सेंटर चलाते हैं। डॉ. रेमथांगपुई सरकारी आइजोल सिविल अस्पताल में काम करती हैं और क्रिटिकल केयर में इकलौती सुपर-स्पेशलिस्ट हैं, जबकि डॉ. विली, जो पहले मिजोरम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और एलआरएम अस्पताल में काम कर चुके हैं, अभी देहरादून में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में पोस्ट-डॉक्टरल सुपर-स्पेशियलिटी डिग्री कर रहे हैं।
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