लद्दाख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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सेना का बढ़ाया मनोबल, चीन को दिया संदेश: शशांक, पूर्व विदेश सचिव
अपने फैसलों के जरिए हमेशा चौंकाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के लेह पहुंचकर सबको चौंका दिया। लेह की अचानक यात्रा से प्रधानमंत्री ने महज चीन और अपने पड़ोसियों को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को बड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है।
चीन को दिया गया संदेश शीशे की तरफ साफ है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत अब दबाव में तो नहीं ही आएगा। जरूरत पड़ी तो दूसरे सभी उपलब्ध विकल्पों को अपनाने से नहीं हिचकेगा। इसका दूसरा पक्ष सेना के मनोबल से जुड़ा है। जाहिर तौर पर इस दौरे से न सिर्फ सेना का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्रधानमंत्री जमीनी स्तर पर सेनाओं की परेशानी का आकलन कर सकेंगे।
हमें यह देखना होगा कि प्रधानमंत्री की लेह यात्रा की टाइमिंग (समय) क्या है? पूर्वी लद्दाख से जुड़े एलएसी पर जारी तनाव, गलवां घाटी में खूनी झड़प के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हो रही है।
इस बातचीत के दौरान चीन तनाव कम करने और सेनाओं को पीछे हटाने पर सहमत तो हो रहा है, मगर जमीनी स्तर पर उसकी ओर से जताई गई सहमति का पालन होता नहीं दिखता। खासतौर पर गलवां घाटी में खूनी झड़प के बीच प्रधानमंत्री ने चीन की मजबूत कूटनीतिक-आर्थिक घेराबंदी की है। इस तनाव के बीच प्रधानमंत्री दुनिया में चीन के विरोधी ताकतवर देशों को भारत के साथ खड़ा करने में सफल रहे हैं।
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