महिलाएं देश की आधी आबादी हैं, लेकिन पुलिस में उनकी भागीदारी महज 10 फीसदी है। द इंडियन इंडेक्स 2016 तक के आंकड़ें के मुताबिक देश में महिला आईपीएस अफसरों की संख्या केवल नौ फीसदी है। वहीं इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस में 30 फीसदी, इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में 17 फीसदी, इंडियन फॉरेन सर्विस में आठ फीसदी और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में महिलाओं की संख्या चार फीसदी है।
पहली महिला आईपीएस अधिकारी कौन
किरन बेदी देश की पहली महिला आईपीएस रहीं। 1972 में भारतीय पुलिस सेवा से जुड़कर किरण बेदी भारत की पहली महिला पुलिस अधिकारी बनीं। वह 80 आईपीएस अफसरों के बैच में अकेली महिला थीं। वह 80 आईपीएस अफसरों के बैच में अकेली महिला थीं।
पुलिस बल में महिलाओं की संख्या में थोड़ा सुधार
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के 2020 में जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश पुलिस बलों में पिछले कुछ सालों से महिलाओं की संख्या में थोड़ा सुधार आया है। 2020 में राज्य और केंद्रशासित प्रदेश पुलिस बलों में महिला कर्मियों की संख्या में 16 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2018 में जहां यह संख्या 1.85 लाख थी वहीं 2019 में यह बढ़कर 2.15 लाख हो गई है। 2014 के बाद से पुलिस बल में महिलाओं की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज हो रहा है। 2014 में लगभग 1.11 लाख महिलाएं राज्य और केंद्रशासित पुलिस बल में थीं।
राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश पुलिस बल में 10.3 फीसदी महिलाएं है। वहीं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में उनकी हिस्सेदारी महज 2.9 फीसदी हिस्सेदारी है। सीएपीएफ के 9.9 लाख में मात्र 29,249 महिलाएं शामिल हैं। सीआईएसएफ में 8,631, सीआरपीएफ में 7,860 और बीएसएफ में महिलाओं की संख्या 5,130 है।
राज्यों पुलिस में महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो इसमें बिहार सबसे पहले नंबर है। नागरिक पुलिस, जिला सशस्त्र रिजर्व पुलिस बल, विशेष सशस्त्र पुलिस बल और भारत रिजर्व बटालियन में कुल 25.3% तक महिलाएं हैं। बिहार के बाद 19.15 फीसदी के साथ हिमाचल प्रदेश दूसरे नंबर, 18.78 फीसदी के साथ चंडीगढ़ और 18.5 फीसदी के साथ तमिलनाडु चौथे नंबर पर है।
आरक्षण की वजह से पुलिस बल में शामिल हो रहीं महिलाएं
आरक्षण ने पुलिस बल में महिलाओं की राह आसान कर दी है। लगभग 14 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश अपने पुलिस बल में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दे रहा है जिससे अब महिलाएं धीरे-धीरे पुलिस की नौकरी में दिलचस्पी लेने लगी हैं। हालांकि महिलाओं को लैंगिक भेदभाव और कार्यस्थल पर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
केवल एक फीसदी महिलाएं पहुंच पाती हैं उच्च पदों पर
2019 में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बताया था पुलिस में जितनी महिलाएं हैं, उनमें से केवल एक फीसदी महिला पुलिसकर्मियों को उच्च पदों तक पहुंचने का मौका मिलता है। 90 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं कॉन्स्टेबल ही रह जाती हैं। आमतौर वो उनकी इसी पद पर भर्ती होती हैं और वे इसी पद से सेवानिवृत हो जाती हैं।
इसी साल मार्च में दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर एक अहम मुद्दा उठाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से आयोग ने दिल्ली पुलिस से यह पूछा था कि 178 पुलिस थानों में से एक भी थाने में महिला एसएचओ क्यों नहीं है। यह हाल तब है जब दिल्ली पुलिस में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण है लेकिन फिर भी महिलाओं की भागीदारी पुलिस फोर्स में बहुत कम है। आयोग का मानना है कि दिल्ली पुलिस में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना बेहद ज़रूरी है।
यह हाल तब है जब 2012 में निर्भया कांड के बाद 2013 में गृह मंत्रालय ने हर पुलिस थाने में कम से कम तीन महिला सब इंस्पेक्टर और दस महिला पुलिस कॉन्स्टेबल नियुक्त करने की सिफ़ारिश की थी। जिससे कि थानों की सूरत और माहौल बदला जा सके और महिला हेल्प डेस्क को 24 घंटे चालू रखा जा सके। लेकिन तमाम तरह की इन कोशिशों के बावजूद पुलिस में महिलाओं की संख्या संतोषजनक नहीं है।
इन उपायों से पुलिस बल में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है
द कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव संस्था ने अपने एक शोध में पुलिस बल में महिलाओं को होने वाली दिक्कतों और उसे दूर करने के उपायों के बारे में बताया है। संस्था ने 2019 में मॉडल पॉलिसी फॉर वीमन इन इंडिया नाम का एक एक्शन प्लान तैयार किया। संस्था का मानना था कि इन उपायों से महिलाओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
महिलाओं की भर्ती से लेकर पोस्टिंग और ट्रेनिंग में संवेदनशील रहा जाए।
प्रमोशन में उनकी योग्यता को नजरअंदाज नहीं किया जाए।
उन्हें परिवार और बच्चों की देखभाल समेत दूसरी सुविधाएं मिले।
कार्यस्थल पर लैंगिंक समानता का ध्यान रखा जाए।