भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का सबसे भारी रॉकेट एलवीएम3-एम2/वनवेब इंडिया-1 (LVM3-M2/OneWeb India-1) का मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इसे शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात 12.07 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से लॉन्च किया गया था। इसरो ने बताया कि ब्रिटेन स्थित ग्राहक के सभी 36 ब्रॉडबैंड संचार उपग्रहों को निर्धारित निचली कक्षाओं (एलईओ) में स्थापित कर दिया गया है।
एक और लॉन्चिंग संभव
दरअसल वनवेब के साथ इसरो की डील हुई है। वह ऐसी दो लॉन्चिंग करेगा। यानी इस लॉन्चिंग के बाद एक और लॉन्चिंग होनी है। एनएसआईएल के एक कार्यकारी ने बताया कि अगले साल की पहली छमाही में एलवीएम3 द्वारा 36 वनवेब उपग्रहों का एक और सेट लॉन्च किया जाएगा। इन सैटेलाइट्स को धरती के निचली कक्षा में तैनात किया जाएगा। ये ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स हैं। जिनका नाम वनवेब लियो (OneWeb Leo) है।
इस रॉकेट की पांचवीं लॉन्चिंग
गौरतलब है कि इससे पहले साल 2019 में इस रॉकेट से चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2), 2018 में GSAT-2, 2017 में GSAT-1 और उससे पहले साल 2014 में क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फियरिक री-एंट्री एक्सपेरीमेंट (CARE) लेकर गया था। ये सारे मिशन भारत सरकार से जुड़े हुए थे, लेकिन यह पहला मौका है जब कोई निजी कंपनी का सैटेलाइट इस रॉकेट में जा रहा है। अब तक इस रॉकेट से चार लॉन्चिंग की गई हैं। चारों की चारों सफल रही है। यह इसकी पांचवीं लॉन्चिंग है।
पीएम मोदी ने बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ISRO को बधाई दी। पीएम मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि एनएसआईएल, इन-स्पेस, इसरो को वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए बने 36 वनवेब उपग्रहों के साथ हमारे सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम3 के सफल प्रक्षेपण पर बधाई। LVM3 आत्मानिभर्ता का उदाहरण है। यह वैश्विक वाणिज्यिक लान्च सेवा बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को बढ़ाता है।
शाह ने भी दी शुभकामना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक दिन करार दिया। शाह ने ट्वीट कर कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए ऐतिहासिक दिन! भारत ने अपने सबसे भारी राकेट LVM3 के सफल प्रक्षेपण के साथ आत्मनिर्भरता के एक नए युग में कदम रखा है, जिसमें 36 वनवेब उपग्रह शामिल थे, हमारे वैज्ञानिकों और पूरी टीम को इसके लिए बधाई।