भारत और फ्रांस की नौसेनाओं का द्विपक्षीय अभ्यास 1993 में शुरू किया गया था। इस अभ्यास को बाद में 2001 में 'वरुण' नाम दिया गया और तब से यह भारत-फ्रांस के रणनीतिक द्विपक्षीय मजबूत संबंधों की पहचान बन गया है।
भारत और फ्रांस की नौ सेनाओं ने भूमध्य सागर में युद्धाभ्यास किया। वरुण अभ्यास के 22वें संस्करण में दोनों देशों की सेनाओं ने एक से बढ़कर एक आधुनिक युद्धक हथियारों और जहाजों का प्रदर्शन किया। इस दौरान समुद्री क्षेत्र में तोप के गोलों और गोलियों की आवाजें गूंजती रहीं।
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भारत और फ्रांस की नौसेनाओं का द्विपक्षीय अभ्यास 1993 में शुरू किया गया था। इस अभ्यास को बाद में 2001 में 'वरुण' नाम दिया गया और तब से यह भारत-फ्रांस के रणनीतिक द्विपक्षीय मजबूत संबंधों की पहचान बन गया है। साल 2024 का वरुण अभ्यास दो से चार सितंबर तक भूमध्य सागर में हुआ। इसमें भारतीय नौसैनिक जहाज तबर और लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान पी-8आई ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। इसमें जहाज-जनित हेलीकॉप्टर भी शामिल रहे।
वहीं फ्रांस की ओर से फ्रंटलाइन जहाज एफएस प्रोवेंस, पनडुब्बी सफ़्रेन, लड़ाकू विमान MB339 और हेलीकॉप्टर NH90 डाउफिन ने युद्धाभ्यास में भाग लिया। इस युद्धाभ्यास में उन्नत नौसैनिक अभियान चलाए गए। इसमें उन्नत सामरिक युद्धाभ्यास, उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, वायु रक्षा अभ्यास और लाइव हथियार फायरिंग हुई।
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बताया गया कि विपक्षीय अभ्यास वरुण भारत-फ्रांस नौसैनिक संबंधों की रीढ़ है। अंतरसंचालनीयता बढ़ाने और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान की दिशा में काफी विकसित हुआ है। नौसेना ने कहा कि भूमध्य सागर में वरुण के 22वें संस्करण का संचालन भारत और फ्रांस के बीच समुद्री क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह हिंद महासागर से दूर भारतीय नौसेना की पहुंच और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। भारतीय नौसेना दुनिया भर में समान विचारधारा वाली नौसेनाओं के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।