बंटवारा किसी देश की भूमि का ही नहीं होता बल्कि लोगों की भावनाओं का भी होता है। इसका दर्द वो ही अच्छी तरह जानते हैं, जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से इसको सहा है। हमारे देश के लोगों ने भी यह दर्द सहा है।
बंटवारे के दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा, अपनों को खोना पड़ा। आजादी के सुनहरे भविष्य के लालच में देश की जनता ने विभाजन को स्वीकार भी किया। लेकिन इस प्रश्न का जवाब आज तक नहीं मिल पाया कि क्या भारत का बंटवारा इतना ही जरूरी था?
हमारा देश इस साल 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों के गुलामी से आजाद हुआ था। स्वतंत्रता के पहले ही भारत का विभाजन हो गया था और उसी समय एक नया देश पाकिस्तान का जन्म भी हुआ था। 14 अगस्त 1947 को ही पाकिस्तान भी अपने अस्तित्व में आ गया था।
संपत्तियों का हुआ था बंटवारा
कहा जाता है कि पाकिस्तान को जहां अचल संपत्ति का 17.5 फीसदी हिस्सा मिला था वहीं भारत का हिस्सा 82.5 फीसदी था। इसमें मुद्रा, सिक्के, पोस्टल और रेवेन्यू स्टैंप्स, गोल्ड रिजर्व और रिजर्व बैंक की संपत्तियां शामिल थीं।
सरकारी टेबल, कुर्सियां, स्टेशनरी, यहां तक कि लाइट बल्ब, स्याही और ब्लॉटिंग पेपर भी बांटे गए थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि सरकारी पुस्तकालयों में उपलब्ध पुस्तकों को भी दोनों देशों के बीच विभाजित किया गया। रेलवे और सड़क परिवहन की संपत्तियों को दोनों देशों के रेलवे और सड़कों के हिसाब से बांटा गया था।
पगड़ी, लाठी, डिक्शनरी तक सब बंटे थे
लाहौर के पुलिस कप्तान ने उस दौरान दोनों देशों के बीच बराबर हिस्सों में सबकुछ बांटा चाहे वह पगड़ी हो, लाठी या फिर राइफल हो। अंत में जो बचा वह था पुलिस बैंड। इसमें पाकिस्तान को बांसुरी दी गई, भारत को ड्रम, पाकिस्तान को ट्रंपेट तो भारत को क्रिंबल्स। पंजाब सरकार के इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिया में उपलब्ध डिक्शनरी को भी दोनों देशों के बीच विभाजित किया गया था।
शराब कंपनियों को भारत में ही रखा गया। चूंकि एक इस्लाम देश होने के नाते पाकिस्तान के लिए शराब हराम मानी गई थी। इन सबके अलावा भारत में एक ही सरकारी प्रेस थी जहां मुद्रा छापी जाती थी। इसलिए भारत ने इसे देने से मना कर दिया और पाकिस्तान ने भारतीय मुद्रा में रबर स्टांप लगाकर इसका उपयोग किया था।
भारत के वायसराय के पास दो शाही गाड़ियां थीं। एक में सोना जड़ा था तो दूसरी में चांदी। जब इसके बंटवारे की बारी आई तो लॉर्ड माउंटबेटन ने टॉस किया और भारत के हिस्से में स्वर्ण जड़ित शाही गाड़ी आई।