इसका सबसे सटीक उदाहरण जमशेदपुर में देखने को मिलता है। जमशेदपुर जिसे टाटानगर भी कहा जाता है, वहाँ टाटा मोटर्स पिछले कई महीनों से ब्लॉक क्लोजर कर रहा है। खास बात यह है कि आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया जहां सैकड़ों कंपनी टाटा मोटर्स के उत्पादन पर निर्भर है, वे भी इस चक्र में फंस चुकी हैं। आदित्यपुर के एक इंडस्ट्री मालिक बताते हैं कि उन्हें इस तरह के ब्लॉक क्लोजर की जानकारी जब तक मिलती है तब तक उनके पास खुद को संभालने का समय नहीं होता। कल अगर बंदी होनी है तो आज खबर मिलती है। इससे हुए घाटे की भी कोई भरपाई नहीं करता। प्रबंधन में ऐसी चूक के कारण मंदी और बंदी के जाल चक्र में फंसी सैकड़ों कंपनियां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
टाटा मोटर्स में डिवीजनल मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए एनसी मिश्रा जिन्हें इस सेक्टर में सालों का अनुभव है वे बताते हैं कि ब्लॉक क्लोजर या सरल भाषा मे कहें तो कंपनी बंदी सालों पहले फैक्ट्री में मशीन और बाकी सारे उपकरणों के मेंटेनेन्स के लिए किया जाता था, वो भी साल में एक बार। इसमें भी वर्कर यूनियन से पूरी बात होती थी और सटीक योजना के तहत ब्लॉक क्लोजर किया जाता था। आज जब गाड़ियों की मांग नहीं है तो हाल कुछ ज्यादा बुरा है। उनके हिसाब से आने वाले साल में ऐसी ही हालत रहने वाली है। ऐसे समय में जब सेल ही नहीं है तो अति उत्पादन के बाद और बाजार में डिमांड की कमी के कारण एक अंतर आता है। इस हालत में इंतजार के अलावा और कुछ करने को नहीं होता है।
इस मुसीबत से निकलने के लिए सरकार और इंडस्ट्री दोनों को तैयार रहना होगा
इससे निकलने के कई रास्ते हैं लेकिन उसके लिए सरकार और इंडस्ट्री दोनों को तैयार रहना होगा। हर व्यवसाय में एक रूखा अंत आता है, लेकिन उससे उभरने के लिए बाजार को दृष्टि देने वालों की जरूरत है। ऐसे निवेशक, पूंजीपति या बड़े कॉरपोरेट हेड जो आने वाले समय की मांग को समझकर नई तकनीक अपनाने या उपलब्ध तकनीक को उभारने में अपना वक्त दे सकते हैं। अलग-अलग कंपनियों में ब्लॉक क्लोजर की लड़ी जलने के बाद क्या कोई ऐसा रास्ता निकाला जा सकता है जिससे इस हानिकारक धुंए को हटाया जा सके।
क्या नए औजार बनाए जा सकते हैं या कामगारों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट के किसी प्रोजेक्ट में लगाया जा सकता है। क्या ऑटोमोबाइल सेक्टर में बिजली से चलने वाली गाड़ियों पर शोध या कोई अन्य काम नहीं हो सकता। क्या जीवन में मोटर इंजन के दूसरे उपयोग पर नहीं सोचा जा सकता है। क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई सकारात्मक उपयोग हो सकता है। अगर इन सवालों पर सोचा गया तो हम मोबाइल क्रांति के बाद ऑटो मोबाइल क्रांति में भी पूरी दुनिया के लिए बड़ा बाजार बन सकते हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो आम जनता अभिमन्यु और यह मंदी एक चक्रव्यूह साबित होगा।