प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय संगीत, नृत्य, सिनेमा और खानपान दुनिया भर के लोगों को भारत से जोड़ रहे हैं। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मिल रही अंतरराष्ट्रीय पहचान और विदेशों से प्राचीन धरोहर वापस लाने के प्रयासों का जिक्र किया। ज्ञान भारतम पहल के तहत प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने पर भी काम हो रहा है। नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन बृहत्तर भारत सोसाइटी की स्थापना के 100 साल पूरे होने के अवसर पर हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पहचान मिल रही है। भारत का संगीत, नृत्य, सिनेमा और खानपान दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों को भारत से जोड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह बात ‘बृहत्तर भारत: दुनिया भर में भारत के सांस्कृतिक संबंध’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भेजे गए अपने लिखित संदेश में कही।
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सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए क्या कर रही सरकार?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सरकार केवल ऐतिहासिक स्मारकों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की प्राचीन पांडुलिपियों को भी सहेजने के प्रयास कर रही है। इसके लिए ज्ञान भारतम पहल के तहत काम किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य भारत की पांडुलिपियों से जुड़ी विरासत को संरक्षित करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि दूसरे देशों में मौजूद भारत की प्राचीन धरोहरों को वापस लाने के प्रयासों को नई गति मिली है।
ऐतिहासिक स्मारकों को सुरक्षित रखने के साथ भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
ज्ञान भारतम पहल के जरिए पांडुलिपियों से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेशों में मौजूद भारत की प्राचीन धरोहरों को वापस लाने के प्रयासों में भी नई तेजी आई है।
कहां और कब आयोजित हो रहा है बृहत्तर भारत सम्मेलन ?
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 14 से 16 अक्तूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) कर रहा है। सम्मेलन में भारत की सांस्कृतिक विरासत और देश के दूसरे समाजों व सभ्यताओं के साथ उसके संबंधों पर चर्चा हो रही है। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री का लिखित संदेश केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने पढ़कर सुनाया।