इससे पहले साल 2016 में इसी वजह से टॉप भारतीय शूटर हिना सिद्धु ने भी ईरान में आयोजित एशियाई एयरगन बैठक में जाने से मना कर दिया था। सौम्या ने आगे लिखा कि 'मैं यह देखकर बहुत निराश महसूस कर रही हूं कि इस तरह की चैंपियनशिप आयोजित करते वक्त खिलाड़ियों के अधिकारों और कल्याण को बहुत कम महत्वपूर्ण माना जाता है।'
सौम्या का कहना है कि जब भी वह राष्ट्रीय टीम में चुनी जाती हैं और भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं तो वह बेहद गौरवान्वित महसूस करती हैं। सौम्या ने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत अफसोस है कि वह इस तरह के एक महत्वपूर्ण चैंपियनशिप में भाग नहीं ले पाएंगी। सौम्या का मानना है कि एक खिलाड़ी खेल को अपनी जिंदगी में सबसे सबसे पहले रखता है लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता।'
ऐसा ही एक फैसला शतरंज खिलाड़ियों में यूक्रेन की बहने अन्ना और मारिया ने भी किया था। उन्होंने मानवाधिकार और लिंग समानता का उल्लंघन मानते हुए सऊदी अरब में टूर्नामेंट खेलने से इंकार कर दिया था। फिलहाल पांच सदस्यीय महिला टीम में शेष सदस्यों की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है।