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Terror Attacks: आतंकियों के सिर पर 'मक्खी' की तरह मंडरा कर उनका खात्मा करेगा यह ड्रोन, घर में घुस कर करेगा वार

हरेंद्र चौधरी
Updated Fri, 09 Aug 2024 09:15 PM IST

सार

जम्मू का ज्यादातर इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है। इन भौगोलिक क्षेत्रों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना सेना के लिए एक चुनौती है। घने जंगलों में आतंकियों पर नजर बनाए रखना काफी मुश्किल है। ऐसे में भारतीय सेना ड्रोन के जरिए आतंकियों की तलाश कर रही है। 
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आतंकियों का ऐसे खात्मा करेगा ये मक्खी ड्रोन - फोटो : अमर उजाला
जम्मू में हाल ही में आतंकवादी हमलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। देखने में आया है कि आतंकवादी सेना पर हमलों को अंजाम देकर जम्मू की भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठा कर जगलों में छिप जाते हैं। जम्मू का ज्यादातर इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है। इन भौगोलिक क्षेत्रों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना सेना के लिए एक चुनौती है। घने जंगलों में आतंकियों पर नजर बनाए रखना काफी मुश्किल है। ऐसे में भारतीय सेना ड्रोन के जरिए आतंकियों की तलाश कर रही है। लेकिन ये ऐसे-वैसे ड्रोन नहीं हैं, बल्कि ये इतने घातक ड्रोन हैं, जो आतंकियों के ठिकानों में घुस कर उन पर हमला करने की क्षमता रखते हैं।
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आतंकियों का ऐसे खात्मा करेगा ये मक्खी ड्रोन - फोटो : अमर उजाला
जम्मू में हाल ही में आतंकवादी हमलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। देखने में आया है कि आतंकवादी सेना पर हमलों को अंजाम देकर जम्मू की भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठा कर जगलों में छिप जाते हैं। जम्मू का ज्यादातर इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है। इन भौगोलिक क्षेत्रों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना सेना के लिए एक चुनौती है। घने जंगलों में आतंकियों पर नजर बनाए रखना काफी मुश्किल है। ऐसे में भारतीय सेना ड्रोन के जरिए आतंकियों की तलाश कर रही है। लेकिन ये ऐसे-वैसे ड्रोन नहीं हैं, बल्कि ये इतने घातक ड्रोन हैं, जो आतंकियों के ठिकानों में घुस कर उन पर हमला करने की क्षमता रखते हैं।

इमारतों में घुस कर करेगा हमला  
भारतीय सेना अब आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक नए नैनो हथियार से लैस है, इसका नाम है होवर-बी कामिकेज माइक्रो-ड्रोन। बेंगलुरु के स्टार्टअप जुलु डिफेंस ने इस ड्रोन को बनाया है। यह ड्रोन मात्र 15 सेमी लंबा, और 260 ग्राम का है। इस ड्रोन को इमारतों में घुसने, आतंकवादियों की तलाश करने और 400 ग्राम के ग्रेनेड से उन्हें खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें मोशन सेंसर और एकॉस्टिक सेंसर भी लगा है। नियमित एक्सरसाइज और ट्रेनिंग के बावजूद, शहरी और ग्रामीण इमारतों में छिपे आतंकवादियों का मुकाबला करते समय भारतीय सेना को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। होवर-बी ड्रोन इस चुनौती को पूरा कर सकता है। वहीं इसे उड़ना भी बेहद आसान है और यह शोर भी नहीं करता है। इसके आने का पता आतंकियों को भी नहीं चलेगा। वहीं इसे जंगलों, रेगिस्तान और हाई-एल्टीट्यूड इलाक़ों में भी काम कर सकता है।

होवर-बी कामिकेज माइक्रो-ड्रोन - फोटो : अमर उजाला
इन ड्रोन में लगा है 400 ग्राम का ग्रेनेड 
तीसरी पीढ़ी के इन्फैंट्री वेटरन और जुलु डिफेंस के मुख्य विकास अधिकारी मेजर (रि.) समर तूर ने अमर उजाला को बताया कि आतंकवादी लगातार पहाड़ों और जंगलों के रास्ते भारत की सीमाओं में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं। होवर-बी खराब मौसम या कोहरे में भी सीमा की निगरानी कर सकता है और किसी भी घुसपैठ की घटना के बारे में अपने बेस को अलर्ट कर सकता है। उन्होंने बताया कि यह माइक्रो ड्रोन किसी भी बिल्डिंग में प्रवेश करके आसपास की बाधाओं से खुद को बचाते हुए अपने लक्ष्य की तलाश करता है। यह 400 ग्राम के ग्रेनेड से लैस है, जिसे रिमोट से ही ब्लास्ट किया जा सकता है। वहीं इसमें एंटी-जैमिंग तकनीक लगी है। इसे पॉकेट में भी रखा जाता है। वहीं इसकी बैट्री सोलर से भी चार्ज किया जा सकता हैं। फ़ुल चार्ज होने पर यह 55 मिनट तक काम कर सकता है। वहीं वाटरप्रूफ होने की वजह से यह बारिश में भी काम कर सकता है।

लाइव टेलीकास्ट फीड भेज सकता है यह ड्रोन
वहीं, होवर-बी केवल दुश्मन पर ही हमला ही नहीं करता, बल्कि यह अपने आस-पास हो रही हलचलों की पहचान कर लेता है या उसके बाद अपने लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता रखता है। सेंसर, नाइट विजन और वीडियो स्ट्रीमिंग फैसिलिटी से लैस यह ड्रोन दिन और रात दोनों ही तरह के ऑपरेशन में कारगर है। इसके अलावा, होवर-बी का इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जा सकता है और दो किलोमीटर दूर से अपने बेस पर लाइव टेलीकास्ट भेज सकता है। मेजर तूर ने कहा, होवर-बी का सेना में शामिल होना भारतीय सेना के आधुनिकीकरण प्रयासों और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए इसकी निरंतर प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बेंगलुरु के स्टार्टअप जुलु डिफेंस ने इस ड्रोन को बनाया है - फोटो : अमर उजाला
क्या होता है कामिकेज ड्रोन?
रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में तबाही मचाने वाला और युद्ध क्षेत्र में गेम-चेंजर का काम करने वाला कामिकेज ड्रोन अपने लक्ष्य पर निशाना साधने के लिए लंबे समय तक उसके इर्द-गिर्द घुम सकता है। इन्हें सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है। यही विशेषता ही इस ड्रोन को एक खतरनाक हथियार बनाती है। कामिकेज ड्रोन की खासियत ये है कि इससे लक्ष्य पर एकदम सटीक निशाना लगाता है, इतना ही नहीं यह ड्रोन उड़ान के बीच में लक्ष्य बदलने या यहां तक कि मिशन को रद्द करने की भी क्षमता रखता है। इस ड्रोन में इन-बिल्ट वॉर हेड होता है।
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