प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार 12 अप्रैल को गुजरात के एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का जिक्र किया। कहा, 'इस जंग के कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में खाद्य भंडार घट रहा है। आज दुनिया एक अनिश्चित स्थिति का सामना कर रही है, क्योंकि किसी को वह नहीं मिल रहा है जो उसे चाहिए। पेट्रोल, तेल और उर्वरक की उपलब्धता घट रही है। दुनिया के सामने अब एक नई और बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। वो यह है कि दुनिया का अन्न भंडार खाली हो रहा है।'
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से हुई बातचीत में भी ये बात कही है। उन्होंने कहा, 'मैं अमेरिका के राष्ट्रपति से बात कर रहा था तो उन्होंने भी इस गंभीर मुद्दे को उठाया। मैंने सुझाव दिया कि यदि डब्लूटीओ अनुमति देता है, तो भारत कल से दुनिया को खाद्य भंडार की आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।'
पीएम मोदी ने यह भी कहा, 'हमारे पास अपने लोगों के लिए पहले से ही पर्याप्त खाद्यान्न है, लेकिन ऐसा लगता है कि हमारे किसानों ने पूरी दुनिया को खिलाने की व्यवस्था कर ली है। लेकिन हमें दुनिया के कानूनों के मुताबिक चलना है, इसिलए मुझे नहीं पता कि इस काम के लिए विश्व व्यापार संगठन कब अनुमति देगा।'
विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ एक बहुपक्षीय संस्था है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नियमन करती है। इसकी स्थापना एक जनवरी 1995 को हुई थी। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में है। फिलहाल 164 देश इसके सदस्य हैं। भारत शुरू से ही डब्ल्यूटीओ का सदस्य रहा है। आज विश्व का 98% व्यापार डब्ल्यूटीओ के दायरे में होता है।
डब्ल्यूटीओ का मकसद संरक्षणवाद (प्रोटेक्शनिज्म) को खत्म कर भेदभावरहित, पारदर्शी और मुक्त व्यापार व्यवस्था बनाना है ताकि सभी देश एक-दूसरे के साथ बिना किसी बाधा (अत्यधिक टैरिफ या प्रतिबंध) के व्यापार कर सकें। संयुक्त राष्ट्र में जहां पांच स्थायी सदस्यों को वीटो पावर प्राप्त है, वहीं डब्ल्यूटीओ में किसी भी राष्ट्र को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। मतलब यहां सब बराबर हैं। डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों की हर दो साल पर मंत्रिस्तरीय बैठक होती है जिसमें आम राय से फैसले होते हैं।
डब्ल्यूटीओ की मंजूरी क्यों जरूरी?
भारत डब्ल्यूटीओ का हिस्सा है। ऐसे में दूसरे देशों को बड़ी मात्रा में कोई उत्पाद सप्लाई करने से पहले डब्ल्यूटीओ से मंजूरी लेना जरूरी है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि बगैर डब्ल्यूटीओ की मंजूरी के कुछ भी सप्लाई नहीं किया जा सकता। दो देशों के बीच आपसी समझौते के तहत भी ऐसा हो सकता है। हालांकि, जब दुनिया के कई देशों को सप्लाई करने की बारी आती है तो डब्ल्यूटीओ की मंजूरी जरूरी हो जाती है।
भारत में अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।
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