गोखले ने कहा कि प्रधानमंत्री की व्लादिवोस्तोक यात्रा के दौरान हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में सहयोग एक प्रमुख क्षेत्र होगा। विदेश सचिव ने कहा कि तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को पूरा करने के लिए दोनों पक्षों के पांच साल का खाका (2019-2024) बनाने की उम्मीद है। भारत अभी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
गोखले ने कहा कि भारत रूस को हाइड्रोकार्बन के एक प्रमुख स्रोत के रूप में देख रहा है ताकि खाड़ी क्षेत्र पर उसकी पूर्ण निर्भरता समाप्त हो सके। उन्होंने कहा कि रूस में तेल और गैस क्षेत्रों के विकास के लिए भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और रूसी संस्थाओं के बीच कुछ आशय-पत्रों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे। गोखले ने कहा कि भारत रूस में नए तेल क्षेत्रों में निवेश की घोषणा कर सकता है और रूस से एलएनजी के आयात पर कुछ ठोस फैसला हो सकता है।
उम्मीद है कि शिखर वार्ता में दोनों नेता कई प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। इनमें अफगान शांति प्रक्रिया और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति शामिल है। वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय संगठनों में सहयोग बढ़ाने के तरीके तलाशने पर भी विचार कर सकते हैं।