'निवेश आकर्षित कर रहीं सरकार की नीतियां'
एक इंटरव्यू में वैष्णव ने कहा कि भारत ने अच्छी तरह नीतियां तैयार की हैं, जो विनिर्माताओं को नए सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित कर रही हैं। विनिर्माता इस क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का एक अनिवार्य हिस्सा है और इसका ऑटोमोबाइल से लेकर कंप्यूटर- मोबाइल फोन और यहां तक कि वॉशिंग मशीन में भी इस्तेमाल किया जाता है।
'हिस्सेदारी बढ़ाने पर भारत की नजर'
भारत में पहले से ही रेनॉल्ट-निसान से लेकर हुंडई तक की ऑटोमोबाइल कंपनियों की फैक्ट्रियां हैं। डेल जैसे कंप्यूटर निर्माता, एप्पल जैसे आपूर्तिकर्ता और सैमसंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक निर्माता हैं। सैमसंग टीवी, वॉशिंग मशीन और फ्रिज आदि का उत्पादन करती है। अब भारत की नजर सेमीकंडक्टर विनिर्माण में उच्च हिस्सेदारी को आगे बढ़ाने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 76 हजार करोड़ रुपये के प्रोत्साहन से माइक्रोन और टाटा सहित चार कंपनियों को फायदा हुआ है।
'भू-राजनीतिक ताकत का लाभ उठा रहा देश'
वैष्णव ने कहा कि देश में पहले ही दुनिया की डिजाइन प्रतिभा का करीब एक तिहाई हिस्सा मौजूद है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका की तकनीकी महत्वकांक्षाओं में भागीदार बनने के लिए इसका और भारत की भू-राजनीतिक ताकत का लाभ उठा रही है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार अन्य पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की तरह चीन से अपनी आपूर्ति श्रृंखला को अलग करना चाहती है।
'निवेश योजनाओं पर विचार कर रहे बड़े खिलाड़ी'
कोरोना के समय बीजिंग के सख्त लॉकडाउन ने वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति को बाधित कर दिया था और कंपनियों ने इसके उत्पादन के लिए वैकल्पिक स्त्रोतों की तलाश शुरू कर दी थी। भारत खुद को चीन के एक ऐसे वैकल्पिक तकनीकी केंद्र के रूप में पेश कर रहा है, जो लोकतांत्रिक और विश्वसनीय है। उन्होंने आगे कहा, जो लोग पहले सोच रहे थे कि क्या हमें भारत कब जाना चाहिए। अब वे पूछ रहे हैं कि हम कितनी जल्दी भारत जाएंगे। यही बदलाव हो रहा है। इसका मतलब है कि व्यावहारिक रूप से हर बड़ा खिलाड़ी अपनी निवेश योजनाओं पर पुनर्विचार कर रहा है और भारत आना चाहता है।