दो दशक में सात हजार से ज्यादा आपदाएं
पेट्रीसिया ने महिलाओं और लड़कियों द्वारा वहन किए जाने वाले असमान बोझ का भी जिक्र किया और कहा कि भारत को भी इस पर तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात को भी माना कि दुनियाभर में जलवायु आपदाओं में तेजी से वृद्धि हुई है और दो दशक से भी कम समय में सात हजार से ज्यादा ऐसी घटनाएं हुईं हैं।
आपदाओं से महिलाएं और लड़कियां सर्वाधिक प्रभावित
उन्होंने आगे कहा कि जो बात इस गंभीर हकीकत को और भी जिंताजनक बनाती है, वह यह है कि महिलाएं और लड़कियां अक्सर इन आपदाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। पेट्रीसिया ने कहा, राष्ट्रमंडल भारत को जी-20 एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि लैंगिक समानता और लैंगिक समावेशी दृष्टिकोण को हर चीज में शामिल किया जाए।
जलवायु प्रेरित आपदाओं में आई तेजी
पेट्रीसिया ने भारत में हाल में आई प्राकृतिक आपदाओं को इस असमानता का एक स्पष्ट उदाहरण बताया और कहा कि भूस्खलनों की संख्या और सूखे को देखना डरावना है और यह सब तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भूस्खलन, सूखा और चरम मौसम की घटनाओं सहित जलवायु-प्रेरित आपदाओं की एक श्रृंखला से जूझ रहा देश भारत इसका उदाहरण है।
भारत अन्य देशों के लिए मॉडल
उन्होंने कहा, 'भारत वास्तव में इन सभी को प्रतिबिंबित करता है, क्योंकि भारत में द्वीपीय राज्य आकार में बड़े हैं और इनका आकार नाइजीरिया के समान है।' उन्होंने राष्ट्रमंडल के भीतर भारत की मौजूदा स्थिति की सराहना की, जो इसकी विविध संस्कृति और विशाल भौगोलिक प्रतिनिधित्व को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में लैंगिक असमानताओं को दूर करने के लिए भारत के सक्रिय प्रयास इसी तरह की चुनौतियों से जूझ रहे अन्य देशों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करते हैं।