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Climate: ‘जलवायु संकट के लिए जिम्मेदार नहीं भारत’, राष्ट्रमंडल की महासचिव का पश्चिम की नीतियां न अपनाने पर जोर

Wed, 31 Jul 2024 09:13 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास ऊर्जा के क्षेत्र में 56 देशों के संगठन राष्ट्रमंडल का नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि अपनी तकनीक और क्षमताओं को साझा करने के साथ ही भारत राष्ट्रमंडल का अग्रणी देश बन सकता है।

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राष्ट्रमंडल की महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड - फोटो : ANI
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विस्तार
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राष्ट्रमंडल की महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने जलवायु संकट को लेकर भारत के बारे में कुछ अहम बातें बताई हैं। स्कॉटलैंड का कहना है कि भारत ऐतिहासिक रूप से जलवायु संकट के लिए जिम्मेदार नहीं रहा है। स्कॉटलैंड ने यह भी कहा कि भारत को 19वीं शताब्दी में अपनी विकास यात्रा के दौरान पश्चिम की प्रदूषणकारी नीतियों को नहीं अपनाना चाहिए था। 

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‘भारत के पास राष्ट्रमंडल का नेतृत्व करने की क्षमता’
स्कॉटलैंड ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास ऊर्जा के क्षेत्र में 56 देशों के संगठन राष्ट्रमंडल का नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि अपनी तकनीक और क्षमताओं को साझा करने के साथ ही भारत राष्ट्रमंडल का अग्रणी देश बन सकता है। स्कॉटलैंड के अनुसार, नए, स्वच्छ और सुरक्षित विकास के मॉडल का उदाहरण पेश करने साथ भारत वैश्विक दक्षिण के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।  

पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने क्या कहा?
राष्ट्रमंडल की महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने कहा, ‘जलवायु संकट के लिए जिम्मेदार न होने के बाद भी भारत को जलवायु से संबंधित गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। इसमें अत्यधिक गरंमी, बाढ़ और अत्यधिक मानसून जैसी घटनाएं शामिल हैं और इसके लिए कार्रवाई की आवश्यकता है।’ स्कॉटलैंड ने आगे कहा, ‘आप भारत में कुछ शहरों में गर्मी का स्तर देखिए, बाढ़ को देखिए, मानसून को देखिए, लोग इन सभी घटनाओं से जूझ रहे हैं। इसलिए भारत को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कार्रवाई की आवश्यकता है।’
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‘पश्चिम की नीतियां न अपनाएं’
आपको बता दें कि इस बार गर्मियों के मौसम में भारत में 536 दिन भीषण गर्मी और लू से दो-चार होना पड़ा। यह बीते 14 वर्षों में सबसे अधिक है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 1901 के बाद 2024 में उत्तर-पश्चिम भारत में जून का महीना सबसे अधिक गर्मी वाला रहा। उधर, बाढ़ की वजह से असम में 3.5 लाख लोग प्रभावित हुए। इसके अलावा भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से केरल के वायनाड में 165 से अधिक लोगों की मौत हो गई। कॉमनवेल्थ की महासचिव ने कहा कि भारत द्वारा पश्चिम के विकास मॉडल का नहीं अपनाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों का विकास मॉडल पूरी तरह से निरर्थक है और इस वजह से जलवायु संकट उत्पन्न हो रहा है।

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