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मानसून: पूर्वोत्तर में 125 साल का रिकॉर्ड टूटा, 316 जिलों में सूखे जैसा संकट; मजबूत अल नीनो का कहां-कैसा असर?

Thu, 01 Oct 2026 08:38 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

मजबूत अल नीनो के बीच इस साल वर्ष 2001 के बाद मानसून चौथा सबसे कमजोर रहा। पूर्वोत्तर में 125 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है। 316 जिलों में सूखे जैसा संकट है। किस राज्य में कितनी बारिश हुई, अल नीनो का कैसा प्रभाव रहा? जानिए इस खबर में
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भारत में मानसून पर अल नीनो का असर - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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मौसम विभाग के मुताबिक भारत में इस साल 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून रहा। मानसून सत्र में सामान्य तौर पर 868.6 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस साल भारत में 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह दीर्घकालिक औसत (एनपीए) का 87.4 फीसदी है। पूर्वोत्तर में 125 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा और 316 जिलों में सूखा जैसा संकट।

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मौसम विभाग ने जहां इसे 2001 के बाद चौथा सबसे कामजोर मानसून माना वहीं इस सत्र में 1901 के बाद से 13वीं सबसे कम बारिश बताया। इसकी प्रमुख वजह प्रशांत महासागर में तेजी से उभरे एल नीनो प्रभाव को माना जा रहा है। मानसून 2026 की सबसे चिंताजनक बात इसका असमान क्षेत्रीय वितरण रहा। जहां मध्य भारत (97% एलपीए) और उत्तर-पश्चिम भारत (94.1% एलपीए) ने राहत की सांस ली और सामान्य बारिश हासिल की, वहीं दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर भारत में गंभीर जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में केवल 1017.1 मिमी बारिश हुई (एलपीए का 74%), जो 1901 के बाद यानी पिछले 125 वर्षों के इतिहास में सबसे कम है। इसी प्रकार दक्षिण प्रायद्वीप में भी सिर्फ 542 मिमी बारिश दर्ज की गई (एलपीए का 76%), जो 1901 के बाद चौथी सबसे कम मानसूनी वर्षा है। फिलहाल मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है, जिसके मार्च 2027 तक जारी रहने की संभावना है।

राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति

  • 12% से 13% की कमी : देश भर में मानसून की कुल बारिश में सामान्य से 12-13% की गिरावट दर्ज की गई
  • 11 साल का रिकॉर्ड : यह 2015 के बाद से पिछले 11 वर्षों का सबसे सूखा मानसून रहा और आजादी के बाद के 10 सबसे सूखे मानसूनों में शामिल हो गया।
  • 43% जिलों में सूखा : देश के लगभग 43% जिलों में सामान्य से कम या बहुत कम बारिश हुई।

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क्षेत्रीय विषमताएं (क्षेत्रवार आंकड़े)

  • पूर्व और पूर्वोत्तर भारत: वर्ष 1901 के बाद से सबसे सूखा मानसून रहा यहां सामान्य बारिश (1,347.4 मिमी) के मुकाबले सिर्फ 1,014.7 मिमी बारिश हुई।
  • बिहार: 5वें साल सूखे का सामना करना पड़ा। राज्य के कुल 38 में से 31 जिलों (82%) में बारिश की कमी रही।
  • दक्षिण भारत: पिछले 24 वर्षों  का सबसे सूखा मानसून रहा, जहां बारिश में 23% से अधिक की कमी रही। 
  • पंजाब: पिछले साल 41% अधिक बारिश हुई थी, वहीं इस साल 42% की कमी (-42%) दर्ज की गई।
  • पश्चिमी राजस्थान: पिछले 8 वर्षों में पहली बार बारिश में 31% की गिरावट दर्ज की गई। यह 2009 के बाद से पश्चिमी राजस्थान का सबसे कम बारिश वाला मानसून सीजन रहा है।

जून में सबसे कम बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक इस साल जून में सामान्य से 35.4 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो पूरे मानसून सीजन में सबसे बड़ी मासिक कमी रही। अगस्त में बारिश 16.3 प्रतिशत और सितंबर में 7.6 प्रतिशत कम रही। जुलाई एकमात्र महीना रहा, जब सामान्य से अधिक बारिश हुई और बारिश एक प्रतिशत ज्यादा दर्ज की गई। 

कम दबाव के तंत्र से राहत
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अगर मानसून के दौरान बने कम दबाव वाले तंत्र नहीं होते तो बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी। इस सीजन में 14 कम दबाव वाले तंत्र बने और उनसे जुड़े 77 दिन दर्ज किए गए, जबकि सामान्य तौर पर ऐसे 57 दिन होते हैं।

ओडिशा है अपवाद, जहां रिकॉर्ड बारिश हुई
देश के कई हिस्से जहां सूखे की चपेट में थे, वहीं ओडिशा में पिछले 20 वर्षों की सबसे अधिक बारिश (1,480 मिमी से अधिक) दर्ज की गई। यह 1901 के बाद से राज्य की 5 सबसे अधिक बारिश वाले मानसूनी वर्षों में से एक है।

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