प्रियम ने अपनी किताब में विभाजन से पहले के राजनीतिक माहौल, 'खूनी विभाजन', कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार के उदाहरणों और गांधी परिवार द्वारा की गई गलतियों का जिक्र किया है। उनका मानना है कि आधुनिक भारत के इतिहास को एक विशेष राजनीतिक कहानी के अनुरूप बताया गया है।
उन्होंने कहा, 'जब हम कांग्रेस पार्टी को यह कहते हुए देखते हैं कि पंडित नेहरू एक राजनेता थे। हम उन्हें (पूर्व प्रधानमंत्री) इंदिरा गांधी के शासन की प्रशंसा करते देखते हैं। हमने उनकी ओर से इस तरह की गलत गणनाएं और गलतियां देखी हैं। उदाहरण के लिए, मैं आपको एक वर्तमान उदाहरण देती हूं। मैं आज ही खबर पढ़ रही थी कि राहुल गांधी कुछ हफ्तों में पूर्वोत्तर से मुंबई तक अपनी भारत न्याय यात्रा शुरू करने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, पूर्वोत्तर ले ले लिया गया। मेरे मतलब है कि चीन इसे लेने वाला था और यह पंडित नेहरू की गलतियों के कारण है। चीन ने हम पर दया दिखाई और संघर्ष विराम की घोषणा की और फिर नेहरू ने कश्मीर के इतने बड़े हिस्से का सौदा किया।'
प्रियम से जब उनकी पुस्तक की प्रेरणा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, महात्मा गांधी की मृत्यु से तीन दिन पहले उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में एक पत्र लिखा था कि कांग्रेस को भंग कर दिया जाना चाहिए और इसे लोक सेवा संघ बना दिया जाना चाहिए और पंडित जवाहरलाल नेहरू उस एनजीओ के प्रमुख होंगे।
उन्होंने कहा, 'संसद के अंतिम शीतकालीन सत्र 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी तरह का विचार दिया- अगर भारत में कांग्रेस होती ही नहीं तो क्या होता? इसलिए जब दो महान दिमाग एक विचार पर एक साथ मिलते हैं, तो निश्चित रूप से कुछ गहन विचार की आवश्यकता होती है और यही कारण है कि मैंने यह पुस्तक लिखी है।'
प्रियम ने कहा कि पुस्तक को खंडों में विभाजित किया गया है। विभाजन से पहले की घटनाओं से जो हमें विभाजन के करीब ले जाती है और जिसके कारण ऐसा खूनी विभाजन हुआ जो इसके लिए कौन जिम्मेदार था।