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100 Crore Covid 19 Vaccination Dose: पहले डोज से 100 करोड़ डोज तक पहुंचने की पूरी कहानी, वैक्सीन की हिचक-पॉलिसी में बदलाव और बनते गए रिकॉर्ड्स

रवींद्र भजनी
Updated Thu, 21 Oct 2021 05:45 PM IST

सार

कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत दिल्ली से हुई। एम्स में अस्पताल के कर्मचारी 34 वर्षीय मनीष कुमार को पहला टीका कोवाक्सिन का लगाया गया था। पहले दिन देशभर में 3000 सेंटरों पर टीका लगाया गया।
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देश में 100 करोड़ लोगों को लगा टीका - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2021 को भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने हेल्थेकयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को संबोधित किया था, जिन्हें सबसे पहले टीका लगना था। नौ महीने बाद भारत ने 100 करोड़ डोज के आंकड़े तक पहुंच गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री अस्पताल गए और ट्वीट भी किया। जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो भारत का टीकाकरण अभियान बड़े ही उबड़-खाबड़ रास्ते पर आगे बढ़ा है। भ्रम की स्थिति बनी। कुछ विवाद भी हुए, पर आज की स्थिति को बहुत अच्छा कहा जा सकता है। 

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देश में 100 करोड़ लोगों को लगा टीका - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2021 को भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने हेल्थेकयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को संबोधित किया था, जिन्हें सबसे पहले टीका लगना था। नौ महीने बाद भारत ने 100 करोड़ डोज के आंकड़े तक पहुंच गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री अस्पताल गए और ट्वीट भी किया। जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो भारत का टीकाकरण अभियान बड़े ही उबड़-खाबड़ रास्ते पर आगे बढ़ा है। भ्रम की स्थिति बनी। कुछ विवाद भी हुए, पर आज की स्थिति को बहुत अच्छा कहा जा सकता है। 

शुरुआत ही विवादों से हुई थी

भारत के ड्रग रेगुलेटर ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की विकसित की गई वैक्सीन कोवीशील्ड को 1 जनवरी 2021 को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया था। अगले ही दिन भारत बायोटेक की स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन को ‘रिस्ट्रिक्टेड’ मोड में इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया गया। यह ट्रायल मोड पर था। इसे लेकर खूब विवाद हुआ।   
कोवाक्सिन ने उस समय तक फेज-3 ट्रायल्स पूरे नहीं किए थे। कोवाक्सिन के ट्रायल्स में 25,800 लोगों को शामिल किया जाना था और उस समय तक आधे भी रजिस्टर नहीं हो सके थे। शुरुआत में कोवाक्सिन लगवाने वालों से फॉर्म भरवाया जाता था, जैसा कि ट्रायल्स के दौरान भराया जाता है। इसमें कहा गया था कि अगर वैक्सीन की वजह से कोई साइड इफेक्ट होता है, तो भारत बायोटेक मुआवजा देगा। 





ट्रायल्स पूरे किए बिना इमरजेंसी अप्रूवल मिला तो दिल्ली, आंध्र प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों ने कोवाक्सिन से दूरी बना ली थी। कोवीशील्ड को ही प्राथमिकता दी गई। भारत बायोटेक बाद में सप्लाई बढ़ाने में भी नाकाम रहा, इसका भी असर टीकाकरण अभियान पर पड़ा। इससे अदार पूनावाला की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) पर ही भारत के टीकाकरण अभियान को सफल बनाने की जिम्मेदारी आ गई थी। तीसरी वैक्सीन के तौर पर अप्रैल में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया गया, जिसे भारत में डॉ. रेड्डी’ज लैबोरेटरी ने बनाया। 

धीमी थी टीकाकरण की शुरुआत

दूसरे देशों के मुकाबले भारत में टीकाकरण - फोटो : अमर उजाला
कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत दिल्ली से हुई। एम्स में अस्पताल के कर्मचारी 34 वर्षीय मनीष कुमार को पहला टीका कोवाक्सिन का लगाया गया था। पहले दिन देशभर में 3000 सेंटरों पर टीका लगाया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हेल्थकेयर वर्कर्स को संबोधित किया, जिन्हें पहले फेज में टीका लगाया जाना था। चुनौती बड़ी थी। भारत की पूरी वयस्क आबादी को टीका लगाने का अभियान इससे पहले कभी नहं चला था। अमेरिका जैसे देशों ने तो जून 2020 से ही वैक्सीन के ऑर्डर दे रखे थे। इस वजह से लग रहा था कि भारत पिछड़ रहा है। भारत ने टीकाकरण शुरू होने के छह दिन पहले वैक्सीन का पहला ऑर्डर दिया। शुरुआत में ऑर्डर भी कम ही टीके के थे। जनवरी में 1.65 करोड़ और फिर फरवरी में 1.45 करोड़, 1.5 करोड़ और फिर 2 करोड़ डोज के ऑर्डर दिए गए थे। मार्च अंत तक 3 करोड़ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाया जाना था। 1 मार्च से 27 करोड़ उन लोगों को टीकाकरण में शामिल किया गया, जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक थी या 45 वर्ष से अधिक उम्र के गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग थे।  

शुरुआत में लोग भी हिचके। पहले दो दिन में जितने टीके लगने थे, उसका सिर्फ 64% टारगेट ही अचीव हो सका। तमिलनाडु और पंजाब में तो वैक्सीन कवरेज 22% और 23% था। 1 मार्च से वरिष्ठ नागरिकों को टीकाकरण में शामिल करना था, पर तब तक सिर्फ 1.4 करोड़ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स ही टीका लगाने आगे आए थे। टारगेट तो 3 करोड़ का था। उस समय डेली केस 15 हजार से नीचे थे, इस वजह से ज्यादा शोर भी नहीं मचा। 

हालांकि, मार्च के पहले हफ्ते से केस बढ़ना शुरू हुए। मौतें भी अचानक बढ़ने लगी। दूसरी लहर आ गई थी। सरकार ने वैक्सीन का एक्सपोर्ट रोका। घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने का फैसला किया। ऑर्डर भी बढ़ाए। 12 मार्च को वैक्सीन का पांचवां ऑर्डर 12 करोड़ (10 करोड़ कोवीशील्ड और 2 करोड़ कोवाक्सिन) डोज का था।  
 

दूसरी लहर के बाद आई तेजी 

कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद लोग घबरा गए। वैक्सीन लगवाने भी आगे आने लगे। तब वैक्सीन की कमी सामने आई। ओडिशा ने तो मार्च में ही वैक्सीन की कमी की शिकायत करना शुरू कर दिया था। केंद्र सरकार ने इस तरह की शिकायतों को खारिज किया और 1 अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक उम्र वाले सभी नागरिकों को टीकाकरण अभियान में शामिल किया। इससे वैक्सीन लगवाने के पात्र लोगों की संख्या 44 करोड़ बढ़ गई और वैक्सीन का सप्लाई भी गड़बड़ा गया। 

अप्रैल के पहले हफ्ते में 35 लाख डोज रोज लग रहे थे, जो अप्रैल के चौथे हफ्ते तक जाकर 22 लाख डोज रोज हो गए। 1 मई से 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया। इससे टीकाकरण अभियान में अतिरिक्त 62 करोड़ लोग जुड़ गए। वैक्सीन की किल्लत पूरे देश में महसूस होने लगी थी। आलोचनाओं के बीच 28 अप्रैल को केंद्र सरकार ने 11 करोड़ डोज कोवीशील्ड और 5 करोड़ डोज कोवाक्सिन का ऑर्डर दिया। इन्हें मई, जून और जुलाई में डिलीवर होना था। 

भ्रम की स्थिति

उम्र के हिसाब से इतने लोगों को लगा टीका - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने जब 19 अप्रैल को वैक्सीनेशन में सभी वयस्कों को शामिल करने का फैसला किया तो भ्रम की स्थिति बनी। हुआ यूं कि सरकार ने राज्यों के दबाव में 18+ को टीकाकरण में शामिल तो कर लिया, पर खर्चा राज्य सरकारों को साझा करने को कह दिया। केंद्र ने तय किया कि 45+ के लिए टीके केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी। अन्य के लिए राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को सीधे वैक्सीन कंपनियों से वैक्सीन खरीदनी होगी। अब राज्यों में वैक्सीन खरीदने की होड़ शुरू हो गई और टीके की किल्लत ने भयावह रूप ले लिया। खरीद को लेकर भ्रम की स्थिति के दौरान हाल ऐसे हो गए कि मई के तीसरे हप्ते में रोज लगने वाले डोज की संख्या गिरकर 13 लाख रह गई। 

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से दूर हुआ भ्रम 

देश में महिलाओं और पुरुषों को टीके लगने का आंकड़ा - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से वैक्सीन खरीद के मामले में बना भ्रम दूर हुआ। 31 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की वैक्सीनेशन पॉलिसी पर सवाल उठाए। यह भी पूछ लिया कि बजट में 35 हजार करोड़ रुपए वैक्सीन खरीदने के लिए रखे थे, उसमें से कितने खर्च किए। सरकार 18-44 वर्ष आयु समूह के लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए इस फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रही?

वैक्सीन पॉलिसी पर निशाने लगे तो प्रधानमंत्री मोदी ने 7 जून को घोषणा की कि केंद्र सरकार ही कंपनियों से वैक्सीन खरीदेगी और राज्यों को देगी। 18-44 वर्ष आयु समूह को फ्री में वैक्सीन दी जाएगी। 75% वैक्सीन केंद्र सरकार ने खरीदने की योजना बनाई और 25% वैक्सीन प्राइवेट अस्पतालों के जरिए वैक्सीनेशन प्रोग्राम में शामिल हुई। इस सुधार को राज्यों की मांग को स्वीकार करने की बात से छिपाया गया।  

टारगेट्स जो पूरे नहीं हुए

वैक्सीन खरीद का मामला सुलझ गया और वैक्सीन की सप्लाई भी बढ़ गई। इसके बाद सितंबर के बीच तक तेजी से वैक्सीनेशन के आंकड़े बढ़े। टारगेट पीछे छूट गए। भारत बायोटेक की कोवाक्सिन की डिलीवरी गड़बड़ाने से यह हालात बने। 31 जुलाई तक भारत ने 30 करोड़ लोगों (60 करोड़ डोज) को पूरी तरह से वैक्सीनेट करने की योजना बनाई थी। पर उस दौरान सिर्फ 46 करोड़ डोज ही लग सके थे। साल के अंत तक पूरी आबादी को वैक्सीनेट करने की योजना भी थी। सरकार ने इसी दौरान कोवीशील्ड के दो डोज का गैप बढ़ाकर 6 हफ्ते और बाद में बढ़ाकर 12 हफ्ते किया। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों का वैक्सीनेशन किया जा सके। 

रिकॉर्ड बनते चले गए

इतने दिन में लगे 100 करोड़ टीके - फोटो : अमर उजाला
21 जून से देश के सभी वयस्कों के लिए केंद्र सरकार की ओर से वैक्सीन लगनी थी। नई वैक्सीन पॉलिसी लागू हुई। इस दिन 88.73 लाख डोज लगाए गए। उसके एक दिन पहले 31.85 लाख डोज लगे थे। यानी एक ही दिन में दोगुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई। यह एक रिकॉर्ड था।  

पहली बार एक करोड़ डोज का आंकड़ा 27 अगस्त को अचीव हुआ। फिर 31 अगस्त और 16 सितंबर को भी इस आंकड़े को पार किया। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को टीका उत्सव के तौर पर मनाया गया और पूरे देश में 2.5 करोड़ डोज लगाए गए।   

6 अगस्त को भारत ने 50 करोड़ डोज की उपलब्धि हासिल की। 2 अक्टूबर को 90 करोड़ और आज हम 100 करोड़ डोज का जश्न मना रहे हैं। सिर्फ चीन में ही 100 करोड़ से अधिक डोज दिए जा सके हैं। उसने सितंबर के आखिर तक 75% आबादी (105 करोड़ लोगों) को पूरी तरह वैक्सीनेट कर लिया है। 
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