भारत और चीन की सेना (फाइल फोटो)
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सेना ने इस बात से इनकार किया है कि पूर्वी लद्दाख में चीन और भारत की सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पार कर इलाके पर कब्जा जमाने की ताजा कोशिश की है। सेना के मुताबिक फरवरी में पैंगोंग समेत सभी तनातनी वाले इलाके से पीछे हटने के समझौते के आधार पर शुरू हुई प्रक्रिया जारी है। इस समझौते के बाद चीन की तरफ से एलएसी पार करने की कोई हिमाकत नहीं की गई है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि चीन की पिपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने कई जगहों पर एलएसी पार कर अपने पुराने हरकतों को दोहराते हुए भारत की जमीन पर अपना दावा जताने की ताजा कोशिशें की है। बीते 6 जुलाई को डेमचक में भारतीय जमीन पर आकर तिब्बती गुरु दलाई लामा के जन्म दिन पर विरोध प्रदर्शन करने की घटना के पहले पैंगोंग में अपनी शैतानीभरी हरकतों को अंजाम दिया। सूत्रों ने बताया कि 2 जून को पैंगोंग के पास भारत और चीन की सेनाओं के बीच फिर हाथापाई हुई।
हालांकि इस घटना ने हिंसक रूप नहीं लिया और मामला स्थानीय स्तर पर निबटा लिया गया। सेना इस घटना से भी इनकार कर रही है। गौरतलब है कि फरवरी में हुए समझौते के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया में अगर कोई तनातनी होती है तो उसे स्थानीय स्तर पर ही निबटाने की कोशिश की जाएगी। सेना सूत्रों का कहना है कि पिछले साल हुई तानतनी के बाद मामला अभी भी काफी जटिल बना हुआ है। लेकिन दोनों सेनाएं संयम बरतते हुए सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश कर रही है।
सैन्य स्तर की 12वें दौर के बातचीत की तैयारी
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया में भारत चीन सैन्य स्तर की 12वें दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक चीन इस दौर में भी सिर्फ गोगरा और हॉट स्प्रींग पर बातचीत करने को कह रहा है।
चीन सामरिक लिहाज से अति महत्वपूर्ण डेपसांग को बातचीत के एजेंडे में शामिल ही नहीं करना चाह रहा। पिछले दो दौर की बातचीत में भी चीन का यही रवैया था। लेकिन भारत के लिए डेपसांग काफी महत्वपूर्ण है। सूत्रों के मुताबिक चीन डेपसांग पर मामले को उलझा कर दूसरे संवेदनशील जगहों के लिए भारत पर दबाव की रणनीति के तहत काम कर रहा है। इसकेनिबटारे के लिए कूटनीतिक और विशेष प्रतिनिधि स्तर पर भी बैक चैनल बातचीत चल रही है।