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INDI alliance: यहां हुई विपक्षी गठबंधन में सबसे बड़ी चूक, अगर ऐसा पहले कर लेते, तो न पड़ते कमजोर और न होती टूट

आशीष तिवारी
Updated Mon, 19 Feb 2024 02:07 PM IST

सार

गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों के कई कद्दावर नेताओं का कहना है कि सीट बंटवारे वाले मामले पर इंडिया ब्लॉक के प्रमुख दल कांग्रेस की ओर से सबसे ज्यादा लापरवाहियां बरती गईं। नतीजा हुआ कि क्षेत्रीय दल सीटों के बंटवारे की घोषणा का इंतजार करते रहे और चुनाव नजदीक आते देख धीरे-धीरे या तो पाला बदलते रहे या अलग होकर सियासी मैदान में अकेले उतर पड़े...
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INDI alliance - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt


हाल में ही I.N.D.I गठबंधन से अलग होकर सियासी मैदान में अकेले ताल ठोंकने वाली पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि कांग्रेस तो अपने सियासी जनाधार को बढ़ाने के लिए न्याय यात्रा निकाल रही है। लेकिन गठबंधन में शामिल अन्य सियासी दलों के लिए मझधार की स्थिति पैदा हो गई। उनका कहना है कि अगर वह अलग होकर चुनावी मैदान में ताल नहीं ठोंकते तो क्या करते। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने अपना लंबा वक्त गठबंधन की रणनीति को मजबूत करने की बजाय चुनाव में लगाया। उनका कहना है कि राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस को विधानसभा चुनाव पर पूरा फोकस करना जरूरी भी था, लेकिन जो दल उन विधानसभा चुनाव में हिस्सेदारी नहीं कर रहे थे, वह किस बात के लिए इंतजार करते रहे। सिर्फ इसलिए कि इन विधानसभा चुनावों से कांग्रेस खाली हो, तो गठबंधन पर ध्यान दें। यह परिस्थितियां गठबंधन में शामिल छोटे-छोटे दलों के लिए बड़ी असहज हो गई।

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार रूपिंदर चहल कहते हैं कि कई जगह पर सियासी गणित तालमेल नहीं खा रही थी इसलिए गठबंधन कमजोर हुआ। इसके अलावा वह कहते हैं कि आपसी गठबंधन के बाद भी सियासी दलों में सामंजस्य न के बराबर दिखा। गठबंधन में शामिल सियासी दल से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि पटना से लेकर मुंबई और बेंगलुरु से लेकर दिल्ली में गठबंधन की बैठकों में जिन मुद्दों पर सियासी रणनीति बनाने की बात हुई, वह असल में कभी गंभीरता से आगे बढ़े ही नहीं। वह कहते हैं कि ऐसा नहीं है इसको लेकर प्रमुख घटक दल कांग्रेस के साथ बातचीत नहीं हुई। लेकिन जिन मुद्दों पर चर्चा होनी थी, उसे छोड़कर सिर्फ बैठकें होती रहीं। उनका मानना है कि अगर एक महत्वपूर्ण बिंदु यानि सीट शेयरिंग पर शुरुआती दौर में ही फैसला हो जाता, तो संभव है गठबंधन की मजबूती बरकरार रहती।

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