Independence Day: प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, हम राजनीतिक मजबूरी के कारण कोई फैसला नहीं लेते। राजनीतिक गुणा-गणित से फैसले नहीं लेते। हमारा एक ही संकल्प है- राष्ट्रहित प्रथम। भारत की गति तेज है, हमारी दिशा ठीक है।
देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हुई है और अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार किया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति भी ठीक की है।
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'हम राजनीतिक गुणा-गणित से फैसले नहीं लेते'
प्रधानमंत्री ने कहा, सुधारों के लिए हमारी प्रतिबद्धता चार दिन की वाहवाही के लिए नहीं है। सुधार की प्रक्रिया किसी मजबूरी में नहीं है, बल्कि देश को मजबूती दिलाने के लिए हैं। हम राजनीतिक मजबूरी के कारण कोई फैसला नहीं लेते। राजनीतिक गुणा-गणित से फैसले नहीं लेते। हमारा एक ही संकल्प है- राष्ट्रहित प्रथम। भारत की गति तेज है, हमारी दिशा ठीक है। हमने प्रति व्यक्ति आय को दोगुना किया है। हमने अर्थव्यवस्था को तेजी से सुधारा है। हमने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति भी ठीक की है।
'जमीन पर लागू करने होंगे सुधार'
उन्होंने कहा कि हर एक सुधार को जमीन पर लागू करना होगा। शासन-प्रशासन की हर इकाई में सुधार करें। पंचायत स्तर पर भी यही हो। ऐसा करेंगे तो देखते ही देखते लाखों सुधार हो जाएंगे। फिर आम जीवन आसान हो जाएगा। ऐसा हो तो हमारे देश का नौजवान नई ऊंचाइयों को छुएगा।
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'मजबूत बैंकिंग से अर्थव्यवस्था की बढ़ती है ताकत'
अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा, 'बैंकिंग क्षेत्र में जो सुधार हुआ। आप सोचिए बैंकिंग क्षेत्र का पहले क्या हाल था, न विकास होता था, ना विस्तार होता था, ना विश्वास बढ़ता था। हमने बैंकिंग क्षेत्र में अनेक सुधार किए। आज विश्व के सबसे मजबूत बैंकों में हमारे बैंकों ने अपना स्थान बनाया। जब बैंकिंग मजबूत होती है तो अर्थव्यवस्था की ताकत भी बढ़ती है।'
'महिलाओं के अपराधों की तुरंत जांच हो'
प्रधानमंत्री ने कहा, महिलाओं के खिलाफ अपराधों की तुरंत जांच हो। यह कृत्य करने वालों को ज्यादा से ज्यादा सजा हो। जब ऐसी राक्षसी मनोवृत्ति को सजा होती है तो वह नजर नहीं आती, कोने में कहीं पड़ी रहती है। ऐसे राक्षसी कृत्य करने वालों को होने वाली सजाओं के बारे में खबरें अब सामने आना जरूरी है, ताकि लोगों को पता चले कि ऐसे कृत्यों का क्या परिणाम होता है।