सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के मुताबिक, भारत में स्वरोजगार वाले युवाओं की तादाद करीब ढाई करोड़ बढ़ी है। 3.30 करोड़ (2016) से बढ़कर 2019 में आत्मनिर्भर युवाओं की संख्या 5.60 करोड़ हो गई। रोजगारों में स्वरोजगार का हिस्सा 14 फीसदी हो गया।
50 लाख रोजगार देंगे पांच साल में भारतीय र्स्टाटअप
नैसकॉम के मुताबिक, 2025 तक स्टार्टअप 50 लाख रोजगार देंगे। इनमें से 11 लाख प्रत्यक्ष और 39 लाख अप्रत्यक्ष होंगे। पांच साल में नौकरी देने में यूनिकॉर्न स्टार्टअप (एक अरब डॉलर से ज्यादा कारोबार वाले) प्रमुख भूमिका निभाएंगे। पिछले साल 24 यूनिकॉर्न ने 60 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष और 1.8 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए।
जानकारों का कहना है कि कौशल बढ़ाकर और नया कौशल अपनाकर बड़ी तादाद में युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं। इंडिया स्किल रिपोर्ट-2020 के अनुसार, मिलेनियल्स (21वीं सदी में किशोरवय पाने वाले) देश के श्रमबल का 47 फीसदी हिस्सा हैं।
चुनौतियों के हल खोजने और नवाचार का जज्बा
2015 बैच की विदेश सेवा अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र में यूथ डेलिगेट सीमा पुजानी कहती हैं कि आज युवा भारतकी सबसे बड़ी ताकत हैं। वे न सिर्फ मतदाता, बल्कि देश के नीति-निर्माण में भी प्रभावी भूमिका में हैं। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने की दिशा में हमारे युवा सरकार, सिविल सोसायटी, उद्योग और शिक्षण संस्थानों से साझेदारी बना रहे हैं। उनमें चुनौतियों के हल खोजने और नवाचार का जज्बा है।
भारतीय युवाओं का लोहा दुनिया ने माना, हैं सुनहरे कल की ताकत
जानकारों के मुताबिक, भारत जैसी मौजूदा जनसांख्यिकी अपने आप में एक बड़ा संसाधन है, जिसे आधुनिक कौशलपूर्ण शिक्षा देकर मजबूत भविष्य तैयार हो सकता है। मौजूदा वैश्विक हालात में आर्थिक रूप से सशक्त देश ही खड़े रह पाएंगे।
भारतीय युवा देश की आर्थिक, विज्ञान-तकनीक और मानव संसाधन क्षमताओं का दोहन कर उसे सुनहरे कल की ओर ले जा सकते हैं। आज हमारे कई युवा दुनिया की नामी कंपनियां संभाल रहे हैं। आईटी क्षेत्र में तो उनका लोहा सात समंदर पार तक दुनियाभर में माना जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों की कमान भारतीयों के हाथ में है।
वर्ष 1001 में महमूद गजनवी की घुसपैठ से लेकर 1947 तक भारत में चली लूटपाट और गुलामी से हुए नुकसान की भरपाई का मौका भारतीय युवा शक्ति में है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक ने अनुमान लगाया है कि अंग्रेजों ने भारत में 1765-1938 के दौरान कर और व्यापार से 45 खरब डॉलर लूटे।
यह ब्रिटेन की जीडीपी का 17 गुना था। 200 साल की गुलामी के दौरान भारत में प्रति व्यक्ति आय में कोई इजाफा नहीं हुआ। 19वीं सदी के पहले के 50 वर्षों में लोगों की आय आधी रह गई थी। अगर अंग्रेजों ने भारत से की कमाई यहीं खर्ची होती तो आज देश दुनिया की महाशक्ति होता।