भूस्खलन जैसी घटनाओं से लोगों के जीवन और संपत्ति को बचाना अब काफी मुश्किल हो गया है। हर साल ऐसी घटनाओं में इजाफा होता जा रहा है। साल 2018 में भी देश के कई राज्यों में भूस्खलन आए। जिसमें जानमाल और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। भूस्खलन का मुख्य कारण पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्य का होना भी है। लेकिन यह भारी बारिश के कारण भी आते हैं।
अनुमान के मुताबिक भूस्खलन के कारण कई विकासशील देशों में आर्थिक नुकसान सकल राष्ट्रीय उत्पाद का 1-2 फीसदी के बीच पहुंच सकता है। भूस्खलन के कारण होने वाली मौत की 80 फीसदी घटनाएं विकासशील देशों में घटी हैं।
भारत के 12.6 फीसदी भूमि क्षेत्र पर भूस्खलन का खतरा है। इसमें बर्फ वाले इलाके को शामिल नहीं किया गया है। इस भूमि क्षेत्र में उत्तर पूर्व हिमालय (दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय क्षेत्र), उत्तर पश्चिम हिमालय (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश औ जम्मू एवं कश्मीर), पश्चिमी घाट और कोंकण की पहाड़ियां (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र) और आंध्रप्रदेश में अरुकु क्षेत्र का पूर्वी घाट शामिल है।
2018 की ये हैं बड़ी घटनाएं
- असम के गुवाहाटी में 24 अगस्त, 2018 को भारी बारिश के कारण जोराबाट इलाके के शंकरदेव नगर और हस्तिनापुर में भूस्खलन हुआ। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। इसके बाद 31 अगस्त, 2018 को खारघुली इलाके में भूस्खलन हुआ, जिससे यहां संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।
- राजस्थान के जयपुर में ट्रांसपोर्ट नगर के पास 19 अगस्त, 2018 को भूस्खलन हुआ था। ये भूस्खलन भारी बारिश के कारण हुआ। इन घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि छह लोग घायल हो गए। इसके साथ ही घरों को भी काफी नुकसान पहुंचा।
- कर्नाटक के कोडागु जिले में 15 से 17 अगस्त, 2018 के बीच में भूस्खलन हुए थे। इस जिले में औसत से 32 फीसदी अधिक बारिश हुई जिससे यहां कई भूस्खलन आए। इससे यहां जानमाल और संपत्ति का काफी नुकसान हुआ। इस दौरान क्षेत्र में करीब 105 भूस्खलन आए थे।