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TISS: एबीवीपी ने वाम छात्र संगठन पर प्रतिबंध का किया विरोध, कहा- विचारों की आजादी का केंद्र हो शिक्षा संस्थान

Thu, 22 Aug 2024 10:11 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

TISS: एबीवीपी ने कहा कि छात्र समूह पर अचानक और निराधार प्रतिबंध लगाने से संगठन में बड़े पैमाने पर अशांति फैल सकती है। यह कार्रवाई भविष्य में छात्र परिषद के चुनावों की ईमानदारी पर गंभीर असर डाल सकती है।
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एबीवीपी - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) में गरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) अपने वैचारिक प्रतिद्वंद्वी वाम छात्र संगठन के समर्थन में आया। एबीवीपी ने संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया और कहा कि शिक्षा संस्थानों को विचारों की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक भागीदारी का केंद्र होना चाहिए। 

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एबीवीपी ने कहा कि छात्र समूह पर अचानक और निराधार प्रतिबंध लगाने से उस संगठन में बड़े पैमाने पर अशांति फैल सकती है। यह कार्रवाई भविष्य में छात्र परिषद के चुनावों की ईमानदारी पर गंभीर असर डाल सकती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

टीआईएसएस ने 19 अगस्त को छात्र संगठन प्रोग्रेसिव स्टुडेंट्स फोरम (पीएसएफ) पर प्रतिबंध लगाया। टीआईएसएस ने आरोप लगाया कि पीएसएफ उन गतिविधियों में शामिल है जो संस्थान के कामकाज में बाधा डालती हैं और इसे बदनाम करती हैं। संस्थान ने यह भी चेतावनी दी कि अगर पीएसएफ अवैध तरीके से कार्यक्रमों का आयोजन करने की कोशिश करता है तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।  
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पीएसएफ का टीआईएसएस प्रशासन के साथ कई बार टकराव हो चुका है। वहीं, एबीवीपी ने कहा कि वह मानती है कि शिक्षा संस्थानों को वैचारिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक भागीदारी का गढ़ होना चाहिए। विभिन्न छात्र संगठनों की मौजूदगी स्वस्थ संवाद को बढ़ावा देने और छात्र समुदाय के विभिन्न दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। 
 
एबीवीपी की सचिव निधि गाला ने कहा, टीआईएसएश पर छात्र संगठनों पर अचानक और अन्यायपूर्ण प्रतिबंध लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर सीधा हमला है। वहीं, टीआईएसएस में एक अन्य वाम छात्र संगठन डेमोक्रेटिक सेक्युलर स्टुडेंट्स फोरम (डीएसएसएफ) ने कहा कि छात्र संगठन पर प्रतिबंध लगाने से संस्थान की पहचान पर सीधा हमला हुआ है। डीएसएसएफ ने एक बयान में कहा कि छात्र संगठन हमेशा सुनिश्चित करते हैं कि सभी छात्रों की आवाजें सुनी जाएं और कैंपस एक स्वस्थ लोकतांत्रिक सक्रियता की जगह बना रहे। 

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