इफको के एमडी यूएस अवस्थी ने कहा कि इफको नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का पेटेंट भारतीय अर्थव्यवस्था को कृषि लागत में कमी लाकर मजबूत करेगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने और उनकी प्रेरणा के मुताबिक किसानों की आय को दोगुनी करेगा।
इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने अपने नैनो टैक्नोलॉजी आधारित उर्वरक नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लिए 20 साल के लिए पेटेंट हासिल किया। इफको के एमडी यूएस अवस्थी ने इसकी जानकारी ट्विटर पर दी।
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उन्होंने कहा, इफको नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का पेटेंट भारतीय अर्थव्यवस्था को कृषि लागत में कमी लाकर मजबूत करेगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने और उनकी प्रेरणा के मुताबिक किसानों की आय को दोगुनी करेगा। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पूर्णतया स्वदेशी नैनो खाद पर्यावरण मित्र और फसलों के अनुपात में इस्तेमाल का गुण होने के कारण स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अनुकूल होगी।
इफको को यह सफलता उसके गुजरात के कलोल स्थित नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर- एनबीआरसी के वैज्ञानिकों ने दिलाई है। यह नैनो खाद जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो इसके लिए युद्धस्तर पर काम शुरू हो गया है। इससे पहले, पिछले साल जुलाई से ही इफ्को नैनो यूरिया विकसित कर किसानों को दे रहा है।
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दुनिया में भारत की यह शुरुआत अपनी तरह की पहली है। इफ्को यहीं नही रुका है, वह वर्तमान में नैनो जिंक और नैनो कॉपर भी विकसित करने की दिशा में जुटा है। नैनो डीएपी भी नैनो यूरिया की तरह से 500 एमएल की बोतल में होगी। यानी किसानों को 18 सौ रुपये की 50 किलो की बोरी की जगह, बहुत कम डीएपी में काम हो जाएगा। इसकी कीमतों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है, लेकिन आकलन के मुताबिक यह छह सौ रुपये प्रति बोतल हो सकती है।