अक्सर देखा गया है कि सामाजिक परिदृश्यों या राजनीतिक लालसा की वजह देश टूटते रहे हैं। भारत से भी टूटकर दो देश पाकिस्तान और बांग्लादेश बने। राजनेता अपनी राजनीतिक लालसा या विकास के नए आयाम गढ़ने के लिए अक्सर देश के अंदर भी कई राज्यों को अलग करते आए हैं। लेकिन आज हम दो देश को एक साथ लाने की मंशा और इससे होने वाले फायदे के बारे में बात कर रहे हैं।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी बहुचर्चित ऑटोबायोग्राफी ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ में नेपाल को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। मुखर्जी के अनुसार, पड़ोसी देश नेपाल, भारत का हिस्सा हो सकता था, लेकिन उस समय भारत के प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
नेपाल के भारत में विलय करने को लेकर नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह ने नेहरू के सामने प्रस्ताव भी रखा था। पर उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। ऑटोबायोग्राफी ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ में इस बात का उन्होंने जिक्र किया है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि ‘नेहरू ने बहुत कूटनीतिक तरीके से नेपाल से निपटा। नेपाल में राणा शासन की जगह राजशाही के बाद नेहरू ने लोकतंत्र को मजबूत करने अहम भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह ने नेहरू को सुझाव दिया था कि नेपाल को भारत का एक प्रांत बनाया जाए। लेकिन नेहरू ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि नेपाल एक स्वतंत्र राष्ट्र है और उसे ऐसा ही रहना चाहिए।' आइए जानते हैं अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह का प्रस्ताव मान लिया होता तो आज भारत कैसा होता...
भारत और नेपाल की संस्कृति और सभ्यता में समानता
नेपाल हिमालय की गोद में बसा एक छोटा-सा देश है। यहां के हसीन नजारें हर किसी को मोह लेते हैं। नेपाल साउथ एशिया का सबसे पुराना देश है और यहां 123 भाषाएं बोली जाती हैं। भारत और नेपाल ऐसे देश हैं, जिन्हें आपस में सभ्यता और संस्कृति साझा करने की बहुत ज्यादा आवश्यकता नहीं है, क्योंकि दोनों देशों की संस्कृति और रीति-रिवाज एक दूसरे से बहुत मेल खाते हैं। दोनों देशों के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक तौर पर साझी विरासत है। नेपाल की संस्कृति पर भारतीय, तिब्बती और मंगोली संस्कृतियों का प्रभाव है। नेपाल की संस्कृति, विश्व की सबसे समृद्ध संस्कृतियों में से एक है।
नेपाल की संस्कृति में शिष्टाचार, पोशाक, भाषा, अनुष्टान, व्यवहार के नियम और मानदंडों के नियम शामिल है और यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। नेपाल की संस्कृति, परंपरा और नवीनता का एक अद्वितीय संयोजन है। नेपाल में भी भारत की तरह त्यौहार और उत्सव देश के संस्कृति का पर्याय हैं। अधिकांश नेपाली त्योहार विभिन्न हिंदू और बौद्ध देवताओं से संबंधित हैं। नेपाल में भी भारत के त्यौहार बुद्ध-जयंती और तीज मनाए जाते हैं। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के रिवाज, परम्पराओं और विचारों का भी इसमें समावेश है। नेपाल के लोग हमारे खानपान, रहन-सहन, रीति-रिवाज और भाषा को समझते हैं और भारत के विभिन्न प्रांतों में रहते हुए देश को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहे हैं।
दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का संबंध माना जाता है। दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत एक-सी है। अगर भगवान राम भारत के हैं तो माना जाता है कि राजा जनक और सीता नेपाल के हैं। अगर महात्मा बुद्ध को निर्वाण प्राप्ति भारत में हुई थी तो उनका जन्म लुंबिनी (नेपाल) में हुआ था। भारत में लाखों नेपाली रोजी-रोटी कमा रहे हैं और यहीं रह रहे हैं। नेपाल में भी लाखों भारतीय रह रहे हैं। दोनों देशों में हिंदी बोली जाती है। काशी का विश्वनाथ मंदिर व काठमांडू का पशुपति नाथ मंदिर दोनों देशों की एकता को दर्शाता है।