भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कैंसर की जांच, निदान और उपचार में तेजी लाने के लिए अनुसंधान प्रस्तावों के कार्यान्वयन पर रुचि व्यक्त की है। आईसीएमआर द्वारा जारी अपने दस्तावेज में कहा गया कि कैंसर मौजूदा समय में देश के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आईसीएमआर कार्यान्वयन अनुसंधान प्रस्तावों को आमंत्रित कर रहा है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य एनपी-एनसीडी के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के ढांचे के भीतर कैंसर स्क्रीनिंग और शीघ्र पता लगाने की कवरेज और गुणवत्ता को बढ़ाना है
भारत ने 2010 में कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया गया था। 2023 में इसका नाम बदलकर एनपीएनसीडी कर दिया गया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, मानव संसाधनों को विकसित करने, स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने, प्रारंभिक रोग निदान को सक्षम करने, प्रबंधन को सुविधाजनक बनाने और कैंसर सहित सामान्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के लिए समय पर रेफरल सुनिश्चित करने में सहायक रहा है।
वर्ष 2020 के लिए ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी ग्लोबोकैन के अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में 19.3 मिलियन नए कैंसर के मामले थे, जिसमें चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरे स्थान पर था। ग्लोबोकैन अनुमानों से संकेत मिलता है कि भारत में 2020 से 2040 तक कैंसर के मामलों में 57.5 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 3.4 का उद्देश्य रोकथाम और उपचार के माध्यम से कैंसर सहित गैर-संचारी रोगों से होने वाली असामयिक मृत्यु दर को एक तिहाई तक कम करना है।