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आईसीएमआर का पहला अध्ययन: वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद भी 76 फीसदी मिले संक्रमित

Fri, 25 Jun 2021 06:43 AM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

  • आईसीएमआर का टीकाकरण को लेकर पहला अध्ययन आया सामने
  • 361 में से 274 में आरटी-पीसीआर जांच आई पॉजीटिव
  • कोविशील्ड की तुलना में कोवाक्सिन लेने वालों में 77 फीसदी ही मिलीं एंटीबॉडी
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टीकाकरण केंद्र के बाहर लगी कतार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना टीकाकरण और संक्रमण को लेकर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देश का पहला अध्ययन जारी किया है जिसके अनुसार वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद 76 फीसदी लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। संक्रमण की चपेट में आने के बाद इनमें से केवल 16 फीसदी लोग ही बिना लक्षण वाले मिले। जबकि करीब 10 फीसदी को अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा। 

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अध्ययन के दौरान 361 लोगों की जांच में 274 की आरटी पीसीआर जांच पॉजीटिव पाई गई। वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के 14 दिन बाद यह लोग कोरोना वायरस की चपेट में आए। कोविशील्ड और कोवाक्सिन को लेकर चल रहे विवाद पर भी आईसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि कोविशील्ड लेने वालों में अधिक एंटीबॉडी बन रही हैं जबकि कोवाक्सिन लेने वालों में एंटीबॉडी 77 फीसदी ही मिली हैं।





मेडिकल जर्नल रिसर्च स्कवायर में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार भुवनेश्वर स्थित आईसीएमआर की क्षेत्रीय लैब में देश भर से वैक्सीन ले चुके 361 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में सभी सैंपल कोरोना संक्त्रस्मित मिले लेकिन 87 सैंपल को अध्ययन से बाहर करना पड़ा क्योंकि इन लोगों ने वैक्सीन की दोनों खुराक नहीं ली थीं। जांच में 274 लोगों में वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद संक्रमण का पता चला। इनमें से 35 (12.8 फीसदी) लोगों ने कोवाक्सिन की दोनों खुराक लीं। जबकि 239 (87.2 फीसदी) ने कोविशील्ड की दोनों खुराक ली थीं।
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इसी साल एक मार्च से 10 जून तक चले अध्ययन में पता चला कि कोवाक्सिन की दोनों खुराक लेने के बाद संक्रमित हुए 43 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारी थे जो दूसरी लहर के दौरान कोविड वार्ड इत्यादि जगहों पर कार्य कर रहे थे। वहीं कोविशील्ड लेने के बाद 10 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारी संक्रमित मिले। दो खुराक लेने के बाद संक्रमण की चपेट में आने के बीच औसतन अवधि 45 दिन देखी गई है। जबकि कोवाक्सिन लेने वालों में 33 दिन के दौरान ही संक्रमण हुआ है। 

अध्ययन के दौरान एक मरीज की मौत
आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के दौरान कोविशील्ड लेने वाले एक व्यक्ति की पोस्ट संक्रमण होने से मौत होने की पुष्टि की है। जबकि सरकार ने अब तक वैक्सीन लगने के बाद एक ही मरीज की मौत होने की जानकारी दी है लेकिन वह मामला महाराष्ट्र से जुड़ा था। जबकि इस अध्ययन में उसकी जानकारी नहीं दी गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दोनों मामले अलग अलग हैं।

11 दिन तक रुकना पड़ा अस्पतालों में
वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद जो लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं उनमें 9.9 फीसदी को भर्ती कराना पड़ा लेकिन इन मरीजों को अस्पतालों से डिस्चार्ज होने में कम से कम 11 दिन का वक्त लगा। एक मरीज तो अभी भी अस्पताल में भर्ती है।

डेल्टा वैरिएंट हो सकता है बड़ी वजह
वैज्ञानिकों का मानना है कि डेल्टा वैरिएंट की वजह से टीकाकरण के बाद भी संक्रमण हो सकता है क्योंकि यह वैरिएंट एंटीबॉडी को कम करता है। 16 जनवरी से देश में टीकाकरण कार्यकेरम चल रहा है लेकिन मार्च माह में दूसरी लहर के दौरान 80 फीसदी से अधिक मामले डेल्टा वैरिएंट से ही जुड़े थे जोकि काफी तेजी से बढ़ते चले गए। वैज्ञानिकों को आशंका है कि इसी वैरिएंट की वजह से वैक्सीन की दोनों खुराक लेने वाले भी कोरोना की चपेट में आए।

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