Tapas drones: रक्षा अधिकारियों ने बताया कि 10 में से छह मेड-इन-इंडिया ड्रोन भारतीय वायु सेना और चार भारतीय नौसेना के लिए होंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना के इस प्रस्ताव पर जल्द ही रक्षा मंत्रालय द्वारा चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
भारतीय वायु सेना ने केंद्र सरकार के सामने 10 तापस ड्रोन खरीदने का प्रस्ताव रखा है। इससे रक्षा बलों की स्वदेशी मानवरहित निगरानी क्षमताएं बढ़ेंगी। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
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रक्षा अधिकारियों ने बताया कि 10 में से छह मेड-इन-इंडिया ड्रोन भारतीय वायु सेना और चार भारतीय नौसेना के लिए होंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना के इस प्रस्ताव पर जल्द ही रक्षा मंत्रालय द्वारा चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने कहा कि ये दोनों बल फिलहाल केवल ड्रोन खरीद रहे हैं। तापस ड्रोन मध्यम ऊंचाई और धीमी गति वाले ड्रोन हैं, जिन्हें रक्षा अनुसंधान एव विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेसी रूप से विकसित किया गया है। इनका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा किया जाना है।
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भारतीय वायुसेना के पास इस्राइली मूल के सर्चर, हेरॉन मार्क-1 और मार्क-2 ड्रोन का बेड़ा है। वायुसेना अमेरिकी प्रीडेटर एमक्यू-9बी ड्रोन को भी शामिल करना चाहता है। अधिकारियों ने कहा कि छह स्वेशी तापस ड्रोन उत्तरी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर निगरानी करने में मदद करेंगे। हाल के दिनों में भारतीय वायुसेना रक्षा के क्षेत्र में मेक इन इंडिया के सबसे बड़े समर्थकों में से एक बनकर उभरी है। जिसने करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के 180 एलसीए मार्क 1 ए और 156 एलसीएच हेलीकॉप्टर्स के ऑर्डर दिए हैं।
भारतीय नौसेना भी समुद्र में निगरानी गतिविधियों के तापस ड्रोन चाहती है। उन्होंने कहा कि अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद चौबीस महीनों के भीतर पहली डिलीवरी होगी।