वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि इस समय दुनिया एक निर्णायक दौर में है और बदलाव का रुख मजबूती के साथ भारत के पक्ष में है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ में भारत का उभरना अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
चौधरी 'भारत और ग्लोबल साउथ: चुनौतियां और अवसर' विषय पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। 20वें सुब्रतो मुखर्जी संगोष्ठी का आयोजन सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज द्वारा किया गया था। बता दें, ‘ग्लोबल साउथ’ या वैश्विक दक्षिण से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि समृद्ध ऐतिहासिक परिदृश्य के साथ देश के औपनिवेशिक छाया से निकलने और एक प्रमुख वैश्विक केंद्रबिंदु के रूप में उभरने से असंख्य चुनौतियां और अवसर सामने आए हैं। परस्पर संबद्धता से आकार लेने वाले भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए जटिल गतिशीलता को समझना महत्वपूर्ण है।
इन अनछुए आसमानों को पार कर रहे
उन्होंने कहा, 'जब हम नये आसमान में उड़ान भरने वाले हैं तो राष्ट्र की शक्ति के अहम कारक के रूप में वायु शक्ति निसंदेह अहम भूमिका निभाएगी और राष्ट्रीय शक्ति के प्रतीक के रूप में तथा शांति एवं सहयोग के साधन के रूप में काम करेगी।'
सुधार करने और विश्वास बनाने की अनुमति
एयर चीफ मार्शल चौधरी ने कहा कि वायु सेना प्रगति, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और ‘ग्लोबल साउथ’ को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकती है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के साथ हमारी वायु शक्ति के जुड़ने की हर तरफ चर्चा है। ग्लोबल साउथ से जुड़कर हमने एक दूसरे को सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने, पारस्परिकता में सुधार करने और विश्वास बनाने की अनुमति दी है।
वार्ताएं महत्वपूर्ण
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वार्ताएं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, 'हमने अन्य देशों के साथ प्रशिक्षण और सहयोग बढ़ाया है।'
नए खिलाड़ियों द्वारा चुनौती दी जा रहीं
वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर वायुसेना प्रमुख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का परिदृश्य लगातार बदल रहा है और पारंपरिक शक्ति संरचनाओं को नए खिलाड़ियों द्वारा तेजी से चुनौती दी जा रही है। उन्होंने कहा, 'वैचारिक विभाजन, संसाधनों की कमी और जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक संघर्ष का खतरा मंडरा रहा है। इसने आर्थिक असमानता और संसाधनों के दोहन जैसी परस्पर चुनौतियां पैदा की हैं।'
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि कोविड-19 जैसी घटनाओं और दुनिया भर में देखे जा रहे संघर्षों ने स्थिति को और खराब कर दिया है।